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इंदौर जल प्रदूषण मामला: मंत्री विजयवर्गीय ने मीडिया के सामने आपत्तिजनक शब्द कहा, बाद में जताया खेद

इंदौर के भगीरथपुरा में जल प्रदूषण मामले पर सवालों से नाराज़ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आपत्तिजनक शब्द कहा, बाद में खेद जताया, कांग्रेस ने इस्तीफे की मांग की।

मध्य प्रदेश के शहरी विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी के मामले पर मीडिया से बातचीत के दौरान अपना आपा खो बैठे और कैमरे पर एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल कर बैठे। घटना के बाद विवाद बढ़ गया, जिसके चलते उन्होंने अपने बयान पर खेद व्यक्त किया। वहीं, विपक्षी कांग्रेस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और राज्य में भाजपा नेताओं पर अहंकार का आरोप लगाया।

भगीरथपुरा क्षेत्र मंत्री विजयवर्गीय के इंदौर-1 विधानसभा क्षेत्र में आता है। बुधवार रात मीडिया से बातचीत के दौरान वह शुरुआत में सवालों के जवाब शांतिपूर्वक दे रहे थे। लेकिन जब पत्रकारों ने पूछा कि भगीरथपुरा के कई मरीजों को निजी अस्पतालों में चुकाए गए बिलों की राशि अब तक वापस क्यों नहीं मिली और इलाके में पीने के साफ पानी की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई, तो वह अचानक नाराज़ हो गए।

इस दौरान मंत्री ने कहा, “छोड़िए, फालतू सवाल मत पूछिए।” इसके बाद एक पत्रकार से उनकी बहस हो गई और इसी क्रम में उन्होंने आपत्तिजनक शब्द का प्रयोग कर दिया। 

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विवाद के बाद मंत्री विजयवर्गीय ने एक बयान जारी कर खेद जताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से वह और उनकी टीम बिना सोए प्रभावित इलाके में हालात सुधारने के लिए लगातार काम कर रही है। दूषित पानी के कारण उनके क्षेत्र के लोग पीड़ित हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है। गहरे दुख की इस स्थिति में मीडिया के सवाल पर उनके शब्द गलत निकल गए, जिसके लिए वह क्षमा चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक उनके लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, वह चैन से नहीं बैठेंगे।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा नेताओं पर अहंकार का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से नैतिक आधार पर विजयवर्गीय का इस्तीफा मांगने को कहा। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगीरथपुरा में दूषित पानी से फैले डायरिया को “आपात स्थिति जैसी” बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि 212 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 50 ठीक होकर घर लौट चुके हैं।

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