सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त जवाब: आतंकवाद बंद होने तक संधि स्थगित रहेगी
भारत ने पाकिस्तान की युद्ध धमकी और सिंधु जल संधि पर बयान को खारिज किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आतंकवाद खत्म होने तक संधि स्थगित रहेगी और पाकिस्तान के आरोप निराधार हैं।
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा दिए गए युद्ध संबंधी बयान पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस तरह के बयान अपनी विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान भटकाने के लिए देता है। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में हो रहे विरोध प्रदर्शन वहां की सरकार की दशकों पुरानी नीतियों का परिणाम हैं। इनमें आर्थिक शोषण, नागरिक अधिकारों का हनन और प्रशासनिक दमन शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके जवाब में पाकिस्तान सरकार ने पुलिस कार्रवाई, आवश्यक वस्तुओं की कमी, इंटरनेट बंदी और नागरिकों पर हिंसक दमन का सहारा लिया है।
भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को विश्वसनीय और स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को स्थगित रखा जाएगा।
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इस बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यदि भारत सिंधु नदी के जल प्रवाह को रोकने की कोशिश करता है, तो इसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला माना जाएगा और पाकिस्तान युद्ध तक जाने से पीछे नहीं हटेगा।
भारत ने पहले भी तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) के फैसले को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह निकाय गलत तरीके से गठित किया गया था और इसके फैसले भारत पर बाध्यकारी नहीं हैं।
सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को समझौता हुआ था, जो सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे से संबंधित है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने अपने संप्रभु अधिकारों का उपयोग करते हुए इस संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था।
भारत का साफ कहना है कि आतंकवाद खत्म होने तक यह संधि बहाल नहीं होगी।