अमेरिका और इजरायल हमें डराना चाहते हैं, लेकिन ईरान कभी नहीं झुकेगा: राष्ट्रपति पेजेश्कियन
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दिल्ली में अमेरिका और इजरायल पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान नहीं झुकेगा। पीएम मोदी से मुलाकात में पश्चिम एशिया और सहयोग पर चर्चा हुई।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में अमेरिका और इजरायल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दोनों देश ईरान को डराने और दबाव में लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान कभी उनके सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर दबाव बनाया गया तो वह उसका जवाब देगा।
बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत पहुंचे पेजेश्कियन ने धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और कारोबारी प्रतिनिधियों को संबोधित किया। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतिथ्य की सराहना की। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और ईरान के बीच बातचीत से संस्कृति, तकनीक, व्यापार, विज्ञान और अर्थव्यवस्था समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
पेजेश्कियन ने फरवरी में शुरू हुए युद्ध का जिक्र करते हुए अमेरिका और इजरायल पर ईरान को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरानी जनता आत्मसमर्पण नहीं करेगी। उन्होंने मानवाधिकारों को लेकर अमेरिका और इजरायल के दावों पर भी सवाल उठाए और स्कूलों, अस्पतालों तथा वैज्ञानिकों को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाया।
और पढ़ें: दुनिया जटिल दौर से गुजर रही, ब्रिक्स को चुनौतियों का जवाब देना होगा: ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन
प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन से इतर पेजेश्कियन से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब दो सप्ताह के भीतर यह दूसरी बैठक है। इससे पहले दोनों की मुलाकात 31 अगस्त को बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
बैठक में भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बीआरआईसीएस से जुड़ी बैठकों में ईरान की नियमित और उच्चस्तरीय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता बढ़ाने में बीआरआईसीएस की भूमिका पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के इस रुख को दोहराया कि सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता, नौवहन एवं व्यापार की स्वतंत्रता तथा समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
और पढ़ें: पीएम मोदी-शी जिनपिंग की आज अहम बैठक, सीमा से व्यापार तक इन मुद्दों पर होगी चर्चा