राजनीतिक गतिरोध के बीच इराक में राष्ट्रपति चुनाव फिर टला, संसद में सहमति नहीं बन पाई
इराक में कुर्द दलों के बीच सहमति न बनने से राष्ट्रपति चुनाव फिर टल गया। राजनीतिक गतिरोध के कारण सरकार गठन की प्रक्रिया और संवैधानिक समयसीमा पर संकट गहराता जा रहा है।
इराक में जारी राजनीतिक गतिरोध के चलते देश की संसद एक बार फिर राष्ट्रपति चुनाव कराने में विफल रही है। इराकी संसद ने लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति के चुनाव से जुड़ा सत्र स्थगित कर दिया है। इससे पहले भी पिछले सप्ताह इसी तरह का फैसला लिया गया था। इस बार भी प्रमुख कुर्द राजनीतिक दलों के बीच सहमति न बन पाने के कारण मतदान नहीं हो सका।
स्थानीय समय के अनुसार रविवार को संसद का सत्र उस समय स्थगित कर दिया गया, जब कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी (केडीपी) और पैट्रियॉटिक यूनियन ऑफ कुर्दिस्तान (पीयूके) राष्ट्रपति पद के लिए किसी एक साझा उम्मीदवार पर सहमत नहीं हो पाए। इसके अलावा, सदन में आवश्यक कोरम की कमी भी सत्र स्थगन का एक अहम कारण रही।
इराकी संसद के मीडिया कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संसद अध्यक्ष ने विभिन्न संसदीय गुटों के नेताओं के साथ बैठक की। इस बैठक में राष्ट्रपति चुनाव के लिए नई तारीख तय करने पर चर्चा की गई। बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि संवैधानिक समयसीमा का पालन किया जाना बेहद आवश्यक है, ताकि राजनीतिक अनिश्चितता को समाप्त किया जा सके।
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गौरतलब है कि इराक में नवंबर में संसदीय चुनाव कराए गए थे। संविधान के अनुसार, संसद के पहले सत्र के 30 दिनों के भीतर राष्ट्रपति का चुनाव किया जाना अनिवार्य है। संसद का पहला सत्र 29 दिसंबर 2025 को आयोजित हुआ था, ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव की समयसीमा पहले ही दबाव में आ चुकी है।
संविधान के तहत राष्ट्रपति के चुनाव के बाद 15 दिनों के भीतर सबसे बड़े संसदीय गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया जाना होता है। इसके बाद प्रस्तावित प्रधानमंत्री को 30 दिनों के भीतर नई सरकार का गठन कर संसद से विश्वास मत हासिल करना अनिवार्य होता है।
इस बीच, इराक के सबसे बड़े संसदीय गठबंधन, कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क (सीएफ) ने पूर्व प्रधानमंत्री नूरी अल-मालिकी को फिर से प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन देने की पुष्टि की है। यह गठबंधन मुख्य रूप से शिया दलों से मिलकर बना है। सीएफ ने सरकार गठन प्रक्रिया में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया है।
हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि नूरी अल-मालिकी दोबारा सत्ता में लौटते हैं तो अमेरिका इराक की मदद बंद कर देगा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अल-मालिकी ने इन बयानों को इराक की संप्रभुता में खुला हस्तक्षेप बताया है।
इराक में 2003 के बाद लागू जातीय-धार्मिक सत्ता साझेदारी प्रणाली के तहत राष्ट्रपति पद कुर्द समुदाय, संसद अध्यक्ष पद सुन्नी मुस्लिम और प्रधानमंत्री पद शिया मुस्लिम के लिए आरक्षित है। मौजूदा हालात में राष्ट्रपति चुनाव में देरी से पूरे राजनीतिक ढांचे पर असर पड़ता दिख रहा है।
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