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राजनीति और सुरक्षा चिंताएं अर्थशास्त्र को पीछे छोड़ देंगी, जयशंकर का बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भविष्य में देशों द्वारा किए गए निर्णयों में राजनीति और सुरक्षा चिंताएं अर्थशास्त्र से अधिक महत्वपूर्ण होंगी। वैश्विक परिदृश्य में संकट और अस्थिरता का दौर शुरू हो चुका है।

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार (17 फरवरी, 2026) को कहा कि भविष्य में देशों द्वारा किए गए निर्णयों में राजनीति और सुरक्षा चिंताएं अर्थशास्त्र से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगी। वह "ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026" शिखर सम्मेलन में बोल रहे थे, जिसे "फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल" ने आयोजित किया था। जयशंकर ने कहा कि दुनिया एक अशांत और अनिश्चित दौर से गुजर रही है, "जो शायद हमारे जीते-जागते इतिहास का सबसे उथल-पुथल वाला समय है।"

उन्होंने यह भी कहा कि आजकल हम उत्पादन, वित्त और बाजार हिस्सों के हथियारकरण और निर्यात नियंत्रण कड़े करने जैसी प्रक्रियाओं को देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक राजनीति और रणनीति अब अर्थशास्त्र को पीछे छोड़ देंगी, जिससे देशों के निर्णय और नीतियों में बदलाव होगा। इस बयान के माध्यम से उन्होंने वैश्विक राजनीति में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा मुद्दों के प्रभाव को रेखांकित किया।

जयशंकर के अनुसार, देशों के बीच आर्थिक सहयोग अब अधिकतर राजनीति और सुरक्षा चिंताओं के संदर्भ में परिभाषित होगा, जिससे वैश्विक सहयोग और व्यापार की संरचनाओं में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। उनके इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि आगामी समय में देशों को अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अंतर्राष्ट्रीय निर्णय लेने होंगे।

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