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कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: कंपनी का डेटा शेयरधारकों का नहीं, कंपनी का होता है

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि कंपनी का डेटा केवल कंपनी का होता है, न कि उसके शेयरधारकों का। डेटा से छेड़छाड़ को साइबर अपराध मानते हुए अदालत ने याचिका खारिज की।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कंपनी का डेटा उसके शेयरधारकों या निदेशकों की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होता, बल्कि वह पूरी तरह कंपनी का होता है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने 25 मार्च को दिए गए आदेश में की।

यह मामला प्लूटस रिसर्च कंपनी से जुड़ा है, जिसमें कंपनी के निदेशक और शेयरधारक आशय हरलाल्का पर कंपनी का डेटा चोरी करने और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। आशय हरलाल्का ने अदालत में याचिका दाखिल कर दावा किया था कि एक शेयरधारक होने के नाते उन्हें कंपनी के डेटा पर स्वामित्व का अधिकार है।

हालांकि, अदालत ने इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने अपने आदेश में कहा कि यह तर्क पूरी तरह गलत है कि शेयरधारक होने के आधार पर कोई व्यक्ति कंपनी के पूरे डेटा का मालिक बन सकता है।

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अदालत ने यह भी कहा कि यदि हर शेयरधारक कंपनी की संपत्ति पर दावा करने लगे, तो इससे कानूनी अराजकता फैल जाएगी और कॉर्पोरेट संरचना की मूल अवधारणा ही खत्म हो जाएगी।

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि कंपनी के डेटा को डाउनलोड करना, कॉपी करना, हटाना या गोपनीय डिजिटल संपत्तियों के साथ छेड़छाड़ करना साइबर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

यह फैसला कॉर्पोरेट गवर्नेंस और डेटा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे कंपनियों के डेटा की सुरक्षा को लेकर स्पष्टता मिलेगी और भविष्य में ऐसे मामलों में कानूनी दिशा भी तय होगी।

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