कर्नाटक हाईकोर्ट की अनुमति: महाशिवरात्रि पर कलबुर्गी दरगाह में शिवलिंग पूजा होगी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने महाशिवरात्रि पर कलबुर्गी की दरगाह में स्थित शिवलिंग की सीमित संख्या में पूजा की अनुमति दी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।
कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद कस्बे में स्थित एक दरगाह परिसर में मौजूद राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा करने की अनुमति देकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने हिंदू समुदाय को बड़ी राहत दी है। अदालत ने यह अनुमति सख्त शर्तों और सीमित संख्या में श्रद्धालुओं के साथ पूजा कराने के निर्देश के तहत दी है।
दरगाह कमेटी ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और परिसर में पूजा पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिससे हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रहा।
यह विवादित स्थल 14वीं सदी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी, जिन्हें लाडले मशायख के नाम से जाना जाता है, और 15वीं सदी के हिंदू संत राघव चैतन्य से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में मौजूद हैं और यहां स्थित संरचना को राघव चैतन्य शिवलिंग कहा जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस स्थान पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग आकर पूजा-अर्चना और इबादत करते रहे हैं।
हालांकि 2022 में पूजा के अधिकार को लेकर विवाद बढ़ गया था। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शिवलिंग को अपवित्र करने की घटना सामने आई, जिससे क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव फैल गया।
पिछले वर्ष फरवरी 2025 में हाईकोर्ट ने 15 हिंदू श्रद्धालुओं को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पूजा की अनुमति दी थी, जो शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी। उसी अनुभव के आधार पर इस वर्ष भी अदालत ने सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को पूजा की अनुमति दी है और प्रशासन को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए श्रद्धालु व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं।
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