पश्चिमी घाट की सुरक्षा के साथ किसानों और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा चाहती है कर्नाटक सरकार: डीके शिवकुमार
कर्नाटक विधानमंडल ने कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की समीक्षा और संशोधन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया। सरकार पश्चिमी घाट संरक्षण के साथ किसानों और स्थानीय समुदायों के हित चाहती है।
कर्नाटक सरकार पश्चिमी घाट के पर्यावरण और जैव विविधता की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा करना चाहती है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को यह बात कही।
कर्नाटक विधानसभा और विधान परिषद ने मंगलवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की समीक्षा करने और आवश्यक संशोधन करने की मांग की गई है। प्रस्ताव में पश्चिमी घाट से संबंधित मौजूदा सिफारिशों पर दोबारा विचार करने की बात कही गई है।
प्रस्ताव के तहत पश्चिमी घाट के प्रभावित क्षेत्रों का नए सिरे से भौतिक सर्वेक्षण कराने की मांग की गई है। इसके अलावा पूरे मामले की समीक्षा के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
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राज्य सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से जुड़े प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए संबंधित मुद्दों पर केंद्र के समक्ष राज्य का पक्ष रखने की दिशा में भी कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि पश्चिमी घाट जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र की रक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ वहां रहने वाले लोगों की आजीविका और अधिकारों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
कस्तूरीरंगन समिति की रिपोर्ट में पश्चिमी घाट के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और वहां कुछ गतिविधियों पर नियंत्रण से संबंधित सिफारिशें की गई थीं। कर्नाटक के कई जिलों में किसानों और स्थानीय निवासियों की ओर से लंबे समय से ऐसी आशंकाएं जताई जाती रही हैं कि रिपोर्ट को लागू करने से उनकी कृषि गतिविधियों और रोजमर्रा की आजीविका पर असर पड़ सकता है।
डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन कायम करना है। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार पश्चिमी घाट की सुरक्षा को महत्व देते हुए किसानों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को भी केंद्र के सामने मजबूती से रखेगी।
विधानमंडल में प्रस्ताव का सर्वसम्मति से पारित होना इस मुद्दे पर राज्य में व्यापक राजनीतिक सहमति को दर्शाता है। अब प्रस्ताव के आधार पर केंद्र के समक्ष कस्तूरीरंगन रिपोर्ट की समीक्षा और आवश्यक बदलाव की मांग रखी जाएगी।
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