जमीन सिर्फ बहाना है, केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी का आरोप- कर्नाटक सरकार एचएमटी के पुनरुद्धार में डाल रही अड़चन
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने एचएमटी जमीन विवाद को राजनीतिक निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि उनका लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के पुनरुद्धार पर केंद्रित है।
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) जमीन विवाद को लेकर कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन विवाद को केवल उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुमारस्वामी ने कहा कि संबंधित जमीन एचएमटी की है और इस मुद्दे को उठाने के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी को फिर से मजबूत करने और इसके पुनरुद्धार पर है।
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार एचएमटी के पुनर्जीवन के प्रयासों में बाधा डाल रही है। उन्होंने कहा कि एचएमटी कभी देश की प्रमुख औद्योगिक संस्थाओं में शामिल थी और इसे दोबारा मजबूत बनाना जरूरी है।
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कुमारस्वामी ने कहा कि जमीन विवाद को लेकर लगाए जा रहे आरोप वास्तविक मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। उन्होंने कहा कि एचएमटी की संपत्तियों और संसाधनों का उपयोग कंपनी के विकास और भविष्य की योजनाओं के लिए किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि एचएमटी जमीन को लेकर हाल के दिनों में कर्नाटक में राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। राज्य सरकार और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिल रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एचएमटी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम रहा है, जिसने देश के औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कंपनी की क्षमताओं को फिर से बढ़ाना और इसे नई दिशा देना है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक संपत्ति को लेकर निर्णय पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और राजनीतिक विवादों के बजाय विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
एचडी कुमारस्वामी ने दोहराया कि एचएमटी की जमीन को लेकर चल रहा विवाद केवल एक बहाना है। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा कंपनी को पुनर्जीवित करना और इसके माध्यम से रोजगार तथा औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।
वहीं, कर्नाटक सरकार की ओर से इस मामले पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्य में एचएमटी जमीन विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रह सकता है।