भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘मछलीपट्टनम’, सातवें माहे श्रेणी के पनडुब्बी रोधी युद्धपोत का जलावतरण
भारतीय नौसेना ने स्वदेशी ‘मछलीपट्टनम’ युद्धपोत का जलावतरण किया। माहे श्रेणी का यह पोत तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियान और हिंद महासागर में भारत की समुद्री शक्ति बढ़ाएगा।
भारतीय नौसेना ने अपने स्वदेशी युद्धपोत निर्माण कार्यक्रम के तहत एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए ‘मछलीपट्टनम’ (बीवाई-529) का सफलतापूर्वक जलावतरण किया। यह माहे श्रेणी के आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू एसडब्ल्यूसी) में सातवां पोत है, जिसका निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा किया जा रहा है।
कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड में आयोजित समारोह में गुलरुख आनंद ने इस युद्धपोत का जलावतरण किया। इस अवसर पर सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद, भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
इस पोत का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है। यह नाम शहर की समृद्ध समुद्री विरासत तथा भारत के पूर्वी तट पर एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में उसकी ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान देने के उद्देश्य से चुना गया है।
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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अत्याधुनिक पोत समुद्र के भीतर निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (लिमो) तथा समुद्री बारूदी सुरंगों से जुड़े अभियानों को अंजाम देने में सक्षम होगा। नौसेना में शामिल होने के बाद यह भारत की तटीय सुरक्षा क्षमता को मजबूत करेगा और समुद्री क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
मंत्रालय ने बताया कि ‘मछलीपट्टनम’ का जलावतरण नौसेना के एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परियोजना का उद्देश्य भारत की तटीय जलसीमा में पनडुब्बियों और अन्य पानी के भीतर मौजूद खतरों की समय रहते पहचान कर उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को बढ़ाना है।
यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। साथ ही, यह भारत के जहाज निर्माण उद्योग की उन्नत नौसैनिक प्लेटफॉर्म के डिजाइन और निर्माण में बढ़ती तकनीकी क्षमता का भी प्रमाण है।
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि माहे श्रेणी के सभी पोत नौसेना की परिचालन क्षमता को मजबूत करेंगे, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देंगे और भारत के समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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