सफाईकर्मियों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग पर विचार: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने सफाईकर्मियों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने पर विचार जताया। अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच की संभावना व्यक्त की।
मद्रास हाईकोर्ट ने सफाईकर्मियों के प्रदर्शन को दबाने के दौरान हुई कथित पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग गठित करने पर विचार व्यक्त किया है। न्यायमूर्ति एम.एस. रमेश और न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन की खंडपीठ ने संकेत दिया कि वे इस मामले में किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को जांच सौंपी जा सकती है ताकि पूरी तरह निष्पक्ष और गहन पड़ताल हो सके।
अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि सफाईकर्मी अपने अधिकारों और वेतन संबंधी मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें बुरी तरह से रोका और कई लोगों को हिरासत में ले लिया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस कार्रवाई में न केवल प्रदर्शनकारियों को चोटें आईं बल्कि उनकी आवाज़ दबाने की भी कोशिश की गई।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच आवश्यक है, ताकि यह तय किया जा सके कि पुलिस ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया या नहीं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी जांच का उद्देश्य दोषारोपण नहीं, बल्कि तथ्यों का सही आकलन करना होगा।
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खंडपीठ ने राज्य सरकार से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा है और संकेत दिया है कि यदि सरकारी रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में एक स्वतंत्र आयोग गठित किया जाएगा। अदालत का मानना है कि इससे न केवल न्याय होगा बल्कि भविष्य में ऐसे विवादों की रोकथाम भी संभव होगी।
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