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e-KYC जांच के बाद महाराष्ट्र सरकार ने लाडकी बहिन योजना से 81 लाख लाभार्थियों को हटाया, विपक्ष ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र सरकार ने ई-केवाईसी सत्यापन के बाद लाडकी बहिन योजना से 81 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया। विपक्ष ने इसे चुनावी लाभ और वित्तीय अनियमितता का मामला बताया।

महाराष्ट्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना के तहत ई-केवाईसी सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद लगभग 81 लाख लाभार्थियों को योजना से बाहर कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्ष के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बताया कि ई-केवाईसी का उद्देश्य केवल पात्र महिलाओं तक आर्थिक सहायता पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि योजना शुरू होने पर 2.63 करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 2.47 करोड़ महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से सहायता दी गई। सत्यापन के बाद लाभार्थियों की संख्या घटकर लगभग 1.67 से 1.70 करोड़ रह गई।

मंत्री के अनुसार, करीब 62 लाख महिलाओं ने कई बार समय सीमा बढ़ाने के बावजूद अनिवार्य ई-केवाईसी पूरी नहीं की। वहीं 16 लाख महिलाओं के परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये की निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई। इसके अलावा 4.42 लाख लाभार्थियों के परिवार का कोई सदस्य सरकारी कर्मचारी निकला। जांच में कुछ पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन्होंने नियमों के विपरीत योजना का लाभ लिया था।

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अदिति तटकरे ने बताया कि अगस्त 2025 में शुरू हुई इस जांच के बाद अपात्र सरकारी कर्मचारियों से राशि की वसूली भी शुरू कर दी गई है और यह धन राज्य कोष में जमा कराया जा रहा है।

दूसरी ओर, विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता संजय राउत ने योजना के क्रियान्वयन में शामिल अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने योजना में हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता रविकांत वरपे ने सवाल उठाया कि यदि महिलाएं पहले पात्र थीं तो अब उन्हें अपात्र क्यों घोषित किया गया। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता अनिल शिदोरे ने भी इसे चिंताजनक बताते हुए पारदर्शी जांच की मांग की।

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