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महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता का फैसला 6 महीने टाला

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता का फैसला छह महीने टाल दिया है। विरोध के बीच सरकार प्रशिक्षण और सत्यापन प्रक्रिया जारी रखेगी।

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य करने के अपने फैसले को फिलहाल छह महीने के लिए स्थगित कर दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने यह निर्णय बढ़ते विरोध और समय सीमा बढ़ाने की मांग के बीच लिया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि चालकों का सत्यापन और प्रशिक्षण प्रक्रिया जारी रहेगी।

इससे पहले राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की थी कि 1 मई से राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा जानना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा था कि महाराष्ट्र के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) इस नियम को लागू करने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे।

सरकार का तर्क था कि महाराष्ट्र में व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को मराठी भाषा का ज्ञान होना चाहिए ताकि यात्रियों को संवाद में कोई कठिनाई न हो। मंत्री ने यह भी कहा था कि यह कदम केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि मराठी भाषा के प्रति अपनापन बढ़ाने का प्रयास है।

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हालांकि, इस फैसले का कई ऑटो और टैक्सी यूनियनों ने विरोध किया और राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। कुछ नेताओं ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए इसकी समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी, ताकि चालक भाषा सीख सकें।

वहीं, मराठी समर्थक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया और इसे लागू करने की वकालत की। शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जैसे दलों ने भी इसे सही कदम बताया।

बाद में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह चालकों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाएगी, जिससे वे मराठी सीख सकें।

अब सरकार के इस फैसले को स्थगित करने से ड्राइवरों को राहत मिली है, जबकि भाषा नीति को लेकर बहस जारी है।

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