नंदीग्राम उपचुनाव में ममता ने कांग्रेस को दिया समर्थन, बंगाल की विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया। तृणमूल के आंतरिक विवाद, उम्मीदवार की गिरफ्तारी और इंडिया गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ी।
पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया है। ममता ने कांग्रेस को ‘स्वाभाविक सहयोगी’ बताते हुए इस फैसले को विपक्षी गठबंधन इंडिया को मजबूत करने से जोड़ा है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया, जब ममता बनर्जी के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने चुनाव से नाम वापस ले लिया। इसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा की। नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है।
ममता के इस कदम से पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मतभेदों के बीच नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। दोनों दल पहले भी कई चुनावों में साथ आ चुके हैं। 2001 के विधानसभा चुनाव और 2009 के लोकसभा चुनाव में दोनों ने गठबंधन किया था। 2011 में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल लंबे शासन को समाप्त किया था। बाद में सीट बंटवारे, नीतियों और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर मतभेदों के कारण यह साझेदारी टूट गई।
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इस बार घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विवाद भी अहम है। निर्वाचन आयोग ने पार्टी के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज कर दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है।
ममता के समर्थन के कुछ घंटों बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कांग्रेस और ममता गुट ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस के अनुसार कार्रवाई लंबित वारंट के आधार पर हुई।
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने हालांकि दोनों दलों के बीच तत्काल राजनीतिक नजदीकी की संभावना को कम करके आंका। उन्होंने कहा कि समर्थन मिलने के समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए।
नंदीग्राम का यह घटनाक्रम राज्य में विपक्षी दलों के बीच तालमेल और तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक विवाद को लेकर आगे की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।