पश्चिम बंगाल SIR मामला: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हो सकती हैं पेश
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाले मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हो सकती हैं।
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने की संभावना है। यह मामला राज्य में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने और SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने से जुड़ा है।
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष होगी, जिसकी अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत करेंगे। बुधवार (4 फरवरी 2026) को इस संबंध में दायर याचिकाओं के एक समूह को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR प्रक्रिया के जरिए राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अनुचित तरीके से मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रक्रिया संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है और इससे लाखों पात्र मतदाताओं के मताधिकार पर संकट उत्पन्न हो गया है। उनका कहना है कि बिना पर्याप्त पारदर्शिता और उचित प्रक्रिया के मतदाता सूची में संशोधन किया गया, जो निष्पक्ष चुनाव की मूल भावना के विपरीत है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और निर्वाचन अधिकारियों पर निशाना साध चुकी हैं। उन्होंने SIR प्रक्रिया को “लोकतंत्र विरोधी” बताते हुए आरोप लगाया है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से किया जा रहा है। ऐसे में उनका सुप्रीम कोर्ट में स्वयं उपस्थित होना इस मामले को और अधिक राजनीतिक और संवैधानिक महत्व दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इस फैसले का असर न केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि देशभर में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रियाओं और चुनावी पारदर्शिता पर भी पड़ सकता है।
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