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मतदाता सूची संशोधन को लेकर ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, चुनाव आयोग से टकराव तेज

बंगाल में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, चुनाव आयोग पर पक्षपात और NRC जैसे कदम का आरोप लगाया, विवाद चुनाव से पहले तेज हुआ।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन—SIR) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शीर्ष अदालत में रिट याचिका दायर की, जिससे तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी टकराव और तीखा हो गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी होनी है और उससे पहले बंगाल विधानसभा चुनाव बेहद करीब है।

‘ममता बनर्जी बनाम भारतीय निर्वाचन आयोग’ शीर्षक से दायर याचिका में चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में बंगाल में चल रहे SIR अभियान को चुनौती दी गई है, जिसे चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों में फर्जी, दोहराव और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाने के उद्देश्य से शुरू किया है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया 2002 के बाद से चली आ रही खामियों को दूर करने के लिए जरूरी है।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि यह पूरी कवायद राजनीतिक पक्षपात से प्रेरित है और प्रतिनिधित्व अधिनियम व उससे जुड़े नियमों का उल्लंघन करती है। उन्होंने SIR को “पिछले दरवाजे से NRC लागू करने” जैसा कदम बताया, जिससे बुजुर्गों, दिव्यांगों, शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाओं और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के मताधिकार छिनने का खतरा है।

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मुख्यमंत्री ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है और तनाव, चिंता व स्वास्थ्य कारणों से 140 से अधिक मौतें हुई हैं। उन्होंने लगभग 8,100 ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ की तैनाती पर भी सवाल उठाते हुए उन्हें अवैध बताया और आरोप लगाया कि ये अधिकारी मतदाता आंकड़ों में हेरफेर कर रहे हैं।

इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को अधिक पारदर्शिता बरतने और दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया आसान बनाने के निर्देश दिए थे। वहीं, चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए SIR को शुद्ध और निष्पक्ष मतदाता सूची सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बताया है।

राज्य चुनाव नजदीक होने के बीच यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक टकराव का रूप ले चुका है।

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