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30 साल के बाद क्यों धीमा होता है मेटाबोलिज्म: हड्डियों और मांसपेशियों की साइलेंट कमी का खतरा

30 साल के बाद शरीर धीरे-धीरे मांसपेशियों और हड्डियों की कमी महसूस किए बिना खोने लगता है, जिससे मेटाबोलिज्म धीमा होता है और वजन बढ़ने लगता है।

कई लोग मानते हैं कि मांसपेशियों की कमजोरी और हड्डियों की गिरावट उम्र के बहुत बाद में ही होती है, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि ये बदलाव पहले से ही शुरू हो सकते हैं। मुंबई के आर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने हाल ही में इस समस्या को उजागर किया। उन्होंने कहा कि मांसपेशियों की गिरावट, जिसे चिकित्सकीय रूप से सार्कोपेनिया कहा जाता है, भारत में सबसे अनदेखी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

विशेषज्ञों के अनुसार “30 साल के बाद, मांसपेशियों और हड्डियों की कमी धीरे-धीरे शुरू हो जाती है। अगर आप अपने शरीर को चुनौती नहीं देते, तो यह धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है।”

हर डॉक्टर आपको अच्छा खाने और अच्छी नींद लेने के लिए कहेगा, लेकिन लगभग कोई भी मांसपेशियों की कमी पर ध्यान नहीं देता। 30 साल की उम्र के बाद आपका शरीर मांसपेशियों को खोना शुरू कर देता है। आप इसे महसूस नहीं कर सकते, लेकिन यह हो रहा है। इसे सार्कोपेनिया कहा जाता है और यह भारत की सबसे अनदेखी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है।

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मांसपेशियों की कमी केवल शरीर को कमजोर नहीं बनाती, बल्कि मेटाबोलिज्म भी धीमा कर देती है। इसलिए आप वही खाना खाते हैं जो पहले खाते थे, लेकिन आपका शरीर इसे अलग तरीके से संग्रहित करता है। वजन धीरे-धीरे बढ़ता है, और कोई इसे मांसपेशियों की कमी से जोड़ता नहीं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित व्यायाम, उचित आहार और वजन उठाने वाली हल्की एक्सरसाइज मांसपेशियों की गिरावट और हड्डियों की कमजोरी को रोकने में मदद कर सकती है।

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