साइबर वित्तीय धोखाधड़ी पर गृह मंत्रालय की नई एसओपी: ₹50,000 से कम राशि की त्वरित वापसी का प्रावधान
गृह मंत्रालय की नई एसओपी के तहत ₹50,000 से कम साइबर वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में अदालत के आदेश के बिना त्वरित धन वापसी संभव होगी और बैंकों को 90 दिनों में होल्ड हटाना होगा।
ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को समय पर राहत दिलाने और साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के तहत साइबर वित्तीय अपराध रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली (CFCFRMS) के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दे दी है।
नई एसओपी के अनुसार, छोटे मूल्य की धोखाधड़ी के मामलों में, जहां रोकी गई या फ्रीज की गई राशि ₹50,000 से कम है, पीड़ितों को अदालत के आदेश के बिना भी त्वरित रूप से धन वापस किया जा सकेगा। यह प्रावधान उन लाखों लोगों के लिए राहत लेकर आएगा, जो छोटी-छोटी रकम की ऑनलाइन ठगी का शिकार होते हैं लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण पैसा वापस नहीं पा पाते।
इसके अलावा, यदि किसी मामले में अदालत या धन बहाली (रेस्टोरेशन) से संबंधित कोई आदेश मौजूद नहीं है, तो बैंकों को 90 दिनों के भीतर उस राशि पर लगाया गया होल्ड हटाना अनिवार्य होगा। इससे खाताधारकों को अनावश्यक देरी और मानसिक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
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सूत्रों के अनुसार, नई एसओपी के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर एक शिकायत निवारण मॉडल (Grievance Redressal Module) और एक धन बहाली मॉडल (Money Restoration Module) भी विकसित किया जाएगा। इन मॉडल के जरिए शिकायतों की निगरानी, बैंकिंग समन्वय और पीड़ितों को धन वापसी की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाएगा।
गृह मंत्रालय का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं और उसके साथ ही साइबर ठगी के मामले भी सामने आ रहे हैं। नई एसओपी से न केवल पीड़ितों को त्वरित राहत मिलेगी, बल्कि बैंकों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भी सुनिश्चित होगा।