एमके स्टालिन का बड़ा विरोध, परिसीमन बिल की कॉपी जलाकर कहा—द्रविड़ भूमि में फैलेगी आग
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने परिसीमन बिल का विरोध करते हुए कॉपी जलाई और इसे काला कानून बताया। केंद्र ने आरोपों को खारिज करते हुए संतुलन का दावा किया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराते हुए एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वे इस प्रस्तावित बिल की प्रति जलाते नजर आए।
स्टालिन ने इस बिल को “काला कानून” बताते हुए राज्यव्यापी विरोध आंदोलन की घोषणा की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक तमिलनाडु के लोगों को उनके ही राज्य में “शरणार्थी” बना देगा।
उन्होंने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला करते हुए उन्हें फासीवादी मानसिकता वाला बताया और कहा कि उनकी “अहंकारपूर्ण राजनीति” को खत्म करना जरूरी है।
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स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु से उठी हिंदी थोपने के खिलाफ जो आग दिल्ली तक पहुंची थी, वह तब तक शांत हुई जब तक केंद्र को झुकना पड़ा। आज मैंने उसी आग को फिर से इस काले कानून को जलाकर जगा दिया है।”
उन्होंने आगे कहा कि यह विरोध अब पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैल जाएगा और भाजपा की राजनीति को झुका देगा। उन्होंने अपने पोस्ट में “#SayNoToNDA” हैशटैग का भी इस्तेमाल किया।
वहीं, परिसीमन बिल को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह प्रक्रिया दक्षिणी राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी कम कर देगी, जिससे उत्तर-दक्षिण के बीच असंतुलन पैदा होगा।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि राज्यों की सीटों में लगभग 56 प्रतिशत तक वृद्धि होगी और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने स्टालिन के कदम की आलोचना करते हुए कहा कि यह राजनीति से प्रेरित है और जनता को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए।
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