कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने सामाजिक न्याय की स्थिति पर वार्षिक रिपोर्ट की मांग की
कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक ने सरकार से ‘सामाजिक न्याय की स्थिति’ पर वार्षिक रिपोर्ट पेश करने की मांग की, ताकि समानता और समावेशिता का आंकड़ों पर मूल्यांकन हो सके।
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह ‘सामाजिक न्याय की स्थिति’ पर एक वार्षिक रिपोर्ट पेश करे और उसे संसद में प्रस्तुत करे। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट का प्रारूप आर्थिक सर्वेक्षण की तरह होना चाहिए, जो हर साल बजट से पहले प्रस्तुत किया जाता है।
वासनिक ने बताया कि भारत में समानता और समावेशिता सुनिश्चित करने में देश ने कितनी प्रगति की है और कहां पीछे रह गया है, इसका आंकड़ों पर आधारित व्यवस्थित आकलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के विभिन्न पहलुओं जैसे दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक और महिलाओं के लिए लागू नीतियों, उनके क्रियान्वयन और परिणामों का विश्लेषण इस रिपोर्ट में शामिल होना चाहिए।
सांसद ने यह भी जोर दिया कि जब आर्थिक नीति और विकास पर विस्तृत आंकड़ों के साथ सर्वेक्षण पेश किया जाता है, तो क्यों न सामाजिक न्याय की स्थिति को भी इसी तरह प्रतिवर्ष मापा और साझा किया जाए। इससे न केवल नीति निर्धारण में मदद मिलेगी, बल्कि यह जनता के सामने सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।
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मुकुल वासनिक ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल कानूनी प्रतिबद्धताओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह वास्तविक जीवन में लोगों तक पहुँचने और अवसरों में समानता सुनिश्चित करने का मापदंड होना चाहिए। उनका यह सुझाव नीति निर्माताओं और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश साबित हो सकता है।
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