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स्वच्छ भारत मिशन के तहत नागपुर का भांडेवाड़ी डंपिंग ग्राउंड बना आधुनिक कचरा प्रसंस्करण केंद्र

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत नागपुर ने भांडेवाड़ी डंपिंग ग्राउंड को आधुनिक कचरा प्रसंस्करण केंद्र में बदलकर वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन का राष्ट्रीय मॉडल प्रस्तुत किया है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत नागपुर ने वर्षों पुराने भांडेवाड़ी डंपिंग ग्राउंड को आधुनिक एकीकृत कचरा प्रसंस्करण केंद्र में बदलकर शहरी अपशिष्ट प्रबंधन का नया उदाहरण पेश किया है। केंद्र सरकार ने बताया कि यह परियोजना 'लक्ष्य जीरो डंपसाइट' अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देशभर में पुराने कचरा स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकास करना है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अनुसार, नागपुर नगर निगम ने दशकों से जमा नगर निगम के ठोस कचरे के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए भांडेवाड़ी डंपिंग ग्राउंड का बड़े पैमाने पर वैज्ञानिक उपचार किया। 30 लाख से अधिक आबादी वाले नागपुर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण घरेलू, व्यावसायिक, संस्थागत और सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाले ठोस कचरे का अधिकांश हिस्सा वर्षों तक इसी डंपिंग स्थल पर जमा होता रहा।

इस समस्या से निपटने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक पुराने कचरे की खुदाई, छंटाई और वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया गया। इस प्रक्रिया से न केवल एक बड़े पर्यावरणीय खतरे को समाप्त किया गया, बल्कि लगभग 55 एकड़ भूमि भी पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हो गई।

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पुनर्विकसित क्षेत्र में अब आधुनिक नगर ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया है, जिसमें मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ), कम्पोस्टिंग इकाइयां, रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) उत्पादन प्रणाली, लीचेट उपचार संयंत्र तथा पर्यावरण निगरानी प्रणाली जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। परियोजना में ट्रॉमेल मशीनें, बैलिस्टिक सेपरेटर, स्काडा (एससीएडीए) आधारित निगरानी प्रणाली, सीसीटीवी और धूल नियंत्रण तकनीकों का भी उपयोग किया गया है।

मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना से लैंडफिल पर निर्भरता कम हुई है, जबकि वायु, जल और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आया है। साथ ही पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति को बढ़ावा मिलने से शहर की सतत कचरा प्रबंधन व्यवस्था और मजबूत हुई है।

भांडेवाड़ी परियोजना के अलावा नागपुर में कम्पोस्ट संयंत्र, अतिरिक्त मैटेरियल रिकवरी केंद्र, मॉड्यूलर कचरा प्रसंस्करण इकाइयां तथा निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र भी स्थापित किए गए हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह मॉडल देश के अन्य शहरी निकायों के लिए भी प्रेरणादायक साबित होगा।

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