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शिमला में उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला सुरक्षा पर राज्य स्तरीय विचार-विमर्श आज

एनसीडब्ल्यू शिमला में महिला सुरक्षा पर राज्य स्तरीय बैठक करेगा, जिसमें पॉश एक्ट के क्रियान्वयन, आंतरिक समितियों की प्रभावशीलता और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने पर चर्चा होगी।

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) आज शिमला में उच्च शिक्षण संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राज्य स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में महिला सुरक्षा से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों पर गंभीर चर्चा करना, संस्थागत तंत्र की प्रभावशीलता का आकलन करना और सभी संबंधित पक्षों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना है। आयोग का मानना है कि सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।

बैठक की अध्यक्षता एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया राहतकर करेंगी। इसमें राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्ट्रार और डीन, महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं वरिष्ठ प्राध्यापक, आंतरिक समितियों के सदस्य, विधि विशेषज्ञ और अधिवक्ता, छात्र नेता एवं प्रतिनिधि, राज्य प्रशासन के अधिकारी तथा आयोग के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उच्च शिक्षण संस्थान युवा महिलाओं के बौद्धिक, सामाजिक और पेशेवर जीवन को दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि महिलाओं की उच्च शिक्षा तक पहुंच में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन परिसर में सुरक्षा, गरिमा और उत्पीड़न-मुक्त वातावरण को लेकर चिंताएं अब भी बनी हुई हैं।

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यौन उत्पीड़न, साइबर उत्पीड़न, भेदभाव, शिकायत निवारण तंत्र के प्रति जागरूकता की कमी तथा कानूनी प्रावधानों के अपर्याप्त क्रियान्वयन जैसी समस्याएं छात्राओं और महिला कर्मचारियों को प्रभावित करती हैं। कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 यानी पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समितियों का गठन और सुरक्षित कार्य एवं अध्ययन वातावरण सुनिश्चित करना अनिवार्य है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में अभी भी कमियां सामने आती हैं।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में महिला सुरक्षा उपायों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी तथा पॉश एक्ट और आंतरिक समितियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाएगा। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और विधिक पक्षों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर भी जोर रहेगा।

इस परामर्श से सुरक्षित परिसरों के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने, निवारक रणनीतियां विकसित करने और संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत बनाने के लिए ठोस सुझाव तैयार किए जाने की उम्मीद है। यह पहल महिलाओं के लिए सुरक्षित, समावेशी और समान शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में आयोग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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