पश्चिम बंगाल के बेलडांगा हिंसा मामले की जांच एनआईए ने संभाली
बेलडांगा हिंसा मामले की जांच एनआईए ने शुरू की। एजेंसी साजिश, अफवाहों और सांप्रदायिक उकसावे की भूमिका की जांच कर रही है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में हुई हिंसा की जांच शनिवार (31 जनवरी, 2026) से औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। यह हिंसा इस महीने की शुरुआत में झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की मौत की खबर सामने आने के बाद भड़की थी। एक अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय एजेंसी ने इस संबंध में नया मामला दर्ज किया है।
एनआईए की एक टीम शनिवार सुबह बेलडांगा पुलिस स्टेशन पहुंची, जहां उसने अब तक की जांच में शामिल अधिकारियों से बातचीत की और संबंधित दस्तावेजों की मांग की। एजेंसी का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या यह हिंसा किसी संगठित साजिश का परिणाम थी, या फिर अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और जानबूझकर की गई उकसावे की कार्रवाई के जरिए सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश की गई।
एक एनआईए अधिकारी ने कहा, “जांच का फोकस यह तय करने पर है कि हिंसा के पीछे कोई सुनियोजित साजिश, फर्जी या भ्रामक सूचनाओं का प्रसार, या सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का इरादा तो नहीं था।”
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बेलडांगा और आसपास के इलाकों में 16 जनवरी को उस समय तनाव फैल गया था, जब यह खबर फैली कि इलाके का एक प्रवासी मजदूर झारखंड में अपने ठिकाने पर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया है। हालात उस वक्त और बिगड़ गए, जब बिहार में उसी क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक अन्य प्रवासी मजदूर पर हमले की खबर सामने आई। इसके बाद करीब दो दिनों तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही।
प्रदर्शनकारियों ने बेलडांगा में राष्ट्रीय राजमार्ग-12 और रेलवे पटरियों को जाम कर दिया, जिससे सड़क और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने मामले की जांच एनआईए को सौंपने का फैसला किया। एक विशेष एनआईए अदालत ने पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया है कि वह इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, रिकॉर्ड और विवरण बिना किसी देरी के केंद्रीय एजेंसी को सौंपे। इससे पहले राज्य पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में 35 लोगों को गिरफ्तार किया था।
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