पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से 25 वर्षीय नर्स की मौत, हाल के वर्षों का पहला मामला
पश्चिम बंगाल के बारासात में निपाह वायरस से 25 वर्षीय नर्स की मौत हुई। यह हाल के वर्षों का पहला मामला है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों और एशियाई देशों में चिंता बढ़ी है।
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बारासात स्थित एक निजी अस्पताल में निपाह वायरस से संक्रमित 25 वर्षीय नर्स की मौत हो गई। राज्य के हालिया इतिहास में यह निपाह वायरस से हुई पहली मृत्यु बताई जा रही है। अस्पताल में एक अन्य नर्स भी संक्रमित पाई गई थी, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों के बीच संक्रमण फैलने का खतरा सामने आया है। संक्रमित महिला नर्स ने हाल ही में टेस्ट में नेगेटिव रिपोर्ट दी थी, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी रही। उसे लंबे समय तक क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में रखा गया और वेंटिलेटर सपोर्ट भी दिया गया, लेकिन गुरुवार शाम करीब 4 बजे उसकी मौत हो गई।
बारासात के इस अस्पताल में दो नर्सिंग स्टाफ के संक्रमित होने से स्वास्थ्य सेवाओं में मानव-से-मानव संक्रमण का खतरा उजागर हुआ है। संक्रमित पुरुष नर्स जनवरी में उपचार के बाद ठीक होकर अस्पताल से छुट्टी पा चुका है, जबकि महिला नर्स की हालत तेजी से बिगड़ती गई। इस घटना के बाद थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे एशियाई देशों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है, क्योंकि निपाह वायरस की मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक बताई जाती है।
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक हेनिपावायरस है, जो मुख्य रूप से चमगादड़ों के लार, मूत्र या मल के संपर्क से इंसानों में फैलता है। संक्रमित खजूर के रस या सूअरों के माध्यम से भी संक्रमण हो सकता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से भी फैल सकता है। इसके लक्षण 4 से 21 दिनों में दिखाई देते हैं, जिनमें बुखार, सिरदर्द और खांसी से शुरू होकर गंभीर निमोनिया या एन्सेफलाइटिस तक स्थिति पहुंच सकती है।
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इस वायरस की घातकता का कारण इसका मस्तिष्क पर तेज असर है, जिससे दौरे, कोमा और सांस की विफलता जैसी स्थिति बन जाती है। अभी तक इसका कोई स्वीकृत टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। उपचार में केवल सहायक चिकित्सा, ऑक्सीजन, वेंटिलेशन और संक्रमण नियंत्रण ही मुख्य उपाय हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी है।
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