निपाह वायरस क्या है? क्या यह कोविड-19 जैसा है? पूरी जानकारी
निपाह वायरस जानवरों से फैलने वाली गंभीर बीमारी है, जिसकी मृत्यु दर अधिक है। यह कोविड-19 से अलग है और इससे बचाव के लिए सावधानी व निगरानी जरूरी है।
निपाह वायरस एक ज़ूनोटिक बीमारी है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलती है। यह संक्रमित भोजन के ज़रिये या सीधे इंसान से इंसान में भी फैल सकती है। पश्चिम बंगाल में एक ही सप्ताह के भीतर निपाह वायरस के पांच मामले सामने आए हैं। इनमें दो नर्सों के बाद तीन नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें एक डॉक्टर, एक नर्स और एक स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। सरकार ने पहले पुष्ट मामलों के बाद लगभग 100 लोगों को होम क्वारंटीन में भेजा है। The Indian Witness के अनुसार, पहले संक्रमित दो नर्सों में से एक की हालत में सुधार है, जबकि दूसरी की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
निपाह वायरस क्या है?
निपाह वायरस की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया में हुई थी। यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है। इसकी उच्च मृत्यु दर और तेजी से फैलने की क्षमता के कारण इसे बायोसेफ्टी लेवल-4 वायरस की श्रेणी में रखा गया है।
लक्षण
इस वायरस का ऊष्मायन काल 5 से 14 दिन का होता है। इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत और मस्तिष्क की सूजन (एन्सेफेलाइटिस) शामिल हैं, जिससे भ्रम, दौरे और कोमा की स्थिति बन सकती है। इसकी मृत्यु दर 40 से 75 प्रतिशत तक पाई गई है।
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फैलने का तरीका
यह वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों और सूअरों जैसे संक्रमित जानवरों के संपर्क से फैलता है। दूषित फल खाने, संक्रमित व्यक्ति के स्राव या सांस की बूंदों से भी संक्रमण हो सकता है।
निपाह बनाम कोविड-19
निपाह वायरस और कोविड-19 अलग-अलग वायरस हैं। निपाह कम संक्रामक है, लेकिन अधिक घातक हो सकता है, जबकि कोविड-19 हवा में तेजी से फैलता है।
बचाव और इलाज
फिलहाल निपाह का कोई विशेष इलाज नहीं है। सहायक उपचार ही मुख्य विकल्प है। साफ-सफाई, फल धोकर खाना और संक्रमित जानवरों से दूरी ही सबसे बेहतर बचाव है।
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