नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम सीमित करने की गाइडलाइन, विशेषज्ञ ने बताया बच्चों के लिए क्यों जरूरी
नोएडा प्रशासन ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में स्क्रीन टाइम सीमित किया है। विशेषज्ञों ने डिजिटल और पारंपरिक शिक्षा के संतुलन को बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी बताया।
नोएडा के स्कूलों में स्क्रीन टाइम पर लगाम
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। गौतम बुद्ध नगर प्रशासन के अनुसार, प्राथमिक कक्षाओं में रोजाना स्क्रीन का इस्तेमाल अधिकतम 30 मिनट, जबकि उच्च प्राथमिक कक्षाओं में 60 मिनट तक सीमित रखा जाएगा।
प्रशासन ने कहा कि स्मार्ट बोर्ड का इस्तेमाल केवल कठिन विषयों को समझाने, तस्वीरें, वीडियो और जरूरी शिक्षण सामग्री दिखाने के लिए किया जाना चाहिए। लगातार और अनावश्यक रूप से डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल करने से बच्चों के स्वास्थ्य, पढ़ाई, खेल और अन्य गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
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पारंपरिक शिक्षा और डिजिटल तकनीक में संतुलन जरूरी
सीएस नायर, सिल्वरलाइन प्रेस्टिज स्कूल, गाजियाबाद में रणनीति, कौशल एवं क्षमता निर्माण के निदेशक, ने कहा कि बच्चों की शिक्षा में मानवीय संपर्क और भावनात्मक जुड़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, सोच-समझकर अपनाई गई शिक्षण पद्धतियां बच्चों को तनाव कम करने, भावनाएं साझा करने और बेहतर सामाजिक कौशल विकसित करने में मदद करती हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल पारंपरिक शिक्षा के साथ संतुलित तरीके से होना चाहिए। इससे बच्चों को किताबें पढ़ने, लिखने और वास्तविक दुनिया से जुड़ी गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त समय मिलता है।
ब्लैकबोर्ड और व्हाइटबोर्ड के इस्तेमाल पर जोर
प्रशासन ने स्कूलों को लिखने, अभ्यास, प्रश्नोत्तर और विद्यार्थियों की भागीदारी वाली गतिविधियों के लिए ब्लैकबोर्ड, व्हाइटबोर्ड या ग्रीनबोर्ड इस्तेमाल करने को कहा है। स्क्रीन की रोशनी और कक्षा की रोशनी उचित रखने तथा लगभग 20 मिनट के स्क्रीन इस्तेमाल के बाद ब्रेक देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
यदि बच्चों में आंखों में जलन, सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना या अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण नजर आते हैं तो अभिभावकों को तुरंत सूचित कर चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा गया है। स्कूलों में हर तिमाही आंखों की जांच कराने पर भी जोर दिया गया है।
प्रशासन ने स्कूलों को ‘डिजिटल-फ्री पीरियड’, ‘डिजिटल जीरो डे’ और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ जैसी गतिविधियां शुरू करने की सलाह दी है। इसका उद्देश्य बच्चों को खेल, रचनात्मक गतिविधियों, पढ़ाई और सामाजिक सहभागिता के लिए पर्याप्त समय देना है।
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