पीसीएमसी चुनाव: कई दिग्गज मैदान से बाहर, तो कई नेताओं ने बदली पार्टी
पीसीएमसी चुनावों से पहले कई दिग्गज नेता बाहर हो गए हैं, कुछ ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया तो कई को टिकट न मिलने से नाराजगी है और कुछ ने पार्टी बदली है।
पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के चुनाव इस बार कई मायनों में अलग नजर आ रहे हैं। 15 जनवरी को होने वाले इन चुनावों से पहले राजनीति में हलचल तेज है, क्योंकि पिछले चुनावों में जीत दर्ज कर चुके कई बड़े नेता इस बार चुनावी मैदान से बाहर हो गए हैं। कुछ नेताओं ने स्वेच्छा से चुनाव न लड़ने का फैसला किया है, जबकि कई अन्य को टिकट नहीं मिला, जिससे वे अपनी ही पार्टियों पर “अन्याय” करने का आरोप लगा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस बार उम्मीदवारों के चयन में पार्टियों ने नए चेहरों को प्राथमिकता दी है, जिसके चलते पुराने और अनुभवी नेताओं को किनारे किया गया। इससे असंतोष की स्थिति पैदा हो गई है और कई नेता खुलकर नाराजगी जता रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिन प्रमुख नेताओं ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है, उनमें आशा शेंडगे शामिल हैं, जो कसारवाड़ी से लगातार दो बार नगरसेवक रह चुकी हैं और पेशे से शिक्षिका हैं। इसके अलावा निगडी-यमुनानगर क्षेत्र से दो बार चुनाव जीत चुके भीमा बोबडे भी इस बार मैदान में नहीं हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एकनाथ पवार, जो दो बार पार्टी के नगरसेवक रह चुके हैं, और अश्विनी चिंचवड़े, जिन्होंने भी दो बार पीसीएमसी नगरसेवक का पद संभाला, वे भी इस बार चुनावी दौड़ से बाहर हैं।
कई नेताओं का कहना है कि टिकट न दिए जाने से उनका मनोबल टूटा है और पार्टी ने उनके वर्षों के योगदान की अनदेखी की है। वहीं, कुछ अन्य नेताओं ने चुनावी संभावनाओं को देखते हुए एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है, जिससे राजनीतिक समीकरण और जटिल हो गए हैं।
पीसीएमसी चुनावों में इस बार उम्मीदवारों की अदला-बदली और दिग्गजों की गैरमौजूदगी से मुकाबला रोचक हो गया है। मतदाताओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नए चेहरे जनता का भरोसा जीत पाते हैं या नहीं।
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