सिर्फ 50 बेड के साथ PGIMER ने किए 5,400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट, देश ने बनाया नया मानक
केवल 50 बेड की क्षमता के बावजूद PGIMER ने 5,400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट कर राष्ट्रीय स्तर पर मिसाल कायम की, जिससे हजारों मरीजों को नया जीवन मिला।
चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) ने सीमित संसाधनों के बावजूद किडनी प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। महज 50 बेड की क्षमता के साथ काम करते हुए PGIMER अब तक 5,400 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक कर चुका है, जिससे उसने देशभर में एक नया राष्ट्रीय मानक स्थापित किया है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ PGIMER भारत में किडनी प्रत्यारोपण करने वाले प्रमुख संस्थानों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। पहले स्थान पर गुजरात के अहमदाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर (IKDRC) है, जहां लगभग 400 बेड विशेष रूप से ट्रांसप्लांट सेवाओं के लिए समर्पित हैं। इसके बावजूद, बेहद सीमित बुनियादी ढांचे के साथ PGIMER का प्रदर्शन स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है।
PGIMER की रीनल ट्रांसप्लांट प्रणाली को देश में सबसे प्रभावी मॉडलों में से एक माना जाता है। यहां मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा अवधि को घटाकर औसतन तीन महीने तक लाया गया है, जो कई अन्य बड़े संस्थानों की तुलना में काफी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि कुशल प्रबंधन, अनुभवी चिकित्सकों, समर्पित नर्सिंग स्टाफ और सुव्यवस्थित अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया का परिणाम है।
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संस्थान के डॉक्टरों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता रही है। PGIMER का यह मॉडल न केवल अन्य सरकारी अस्पतालों के लिए एक उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सही योजना और प्रतिबद्धता से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
इस सफलता से हजारों किडनी रोगियों को नया जीवन मिला है और आने वाले समय में PGIMER की यह उपलब्धि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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