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पीएम इंटर्नशिप योजना में रुचि कम: केवल हर पाँच में से एक उम्मीदवार ने ऑफर स्वीकार किया

पीएम इंटर्नशिप योजना में 1.65 लाख ऑफरों में से केवल 20% स्वीकार हुए और स्वीकार करने वालों में से भी 20% ने बीच में इंटर्नशिप छोड़ दी, रुचि बेहद कम रही।

प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत युवाओं को बड़े पैमाने पर अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से अक्टूबर 2024 में शुरू किए गए पायलट प्रोजेक्ट ने एक साल में 1.25 लाख इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य पार कर लिया है। इसके बावजूद, युवाओं में इस योजना के प्रति अपेक्षित उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों ने दो चरणों में कुल 1.65 लाख इंटर्नशिप ऑफर जारी किए, लेकिन इनमें से केवल 33,000 ऑफर—यानी लगभग 20%—ही स्वीकार किए गए।

कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा में जानकारी दी कि बड़ी संख्या में युवाओं ने ऑफर ठुकराए। उम्मीदवारों ने ऑफर ठुकराने के पीछे प्रमुख कारणों में इंटर्नशिप का स्थान, कार्य भूमिका और अवधि को बताया। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना का दायरा व्यापक होने के बावजूद, युवाओं की व्यावहारिक परिस्थितियाँ और प्राथमिकताएं उन्हें इंटर्नशिप स्वीकार करने से रोक रही हैं।

इसके अलावा, जो उम्मीदवार इंटर्नशिप शुरू भी कर चुके थे, उनमें से भी एक बड़ा हिस्सा इसे पूरा नहीं कर पाया। कुल 33,000 स्वीकार किए गए ऑफरों में से 6,618 प्रतिभागियों—यानी लगभग 20%—ने इंटर्नशिप बीच में ही छोड़ दी। इससे योजना की प्रभावशीलता और उसकी वास्तविक पहुंच पर सवाल उठते हैं।

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विशेषज्ञों का मानना है कि इंटर्नशिप के स्थान, वेतन, कार्य वातावरण और अपेक्षाओं के बीच सामंजस्य न होना युवाओं के बीच इस कम रुचि का कारण हो सकता है। हालांकि, सरकार इस योजना को युवाओं के कौशल विकास और उद्योग से जोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानती है।

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