ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर पीएम मोदी का बजट से जवाब, भारत की अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कवच
केंद्र सरकार के बजट 2026 में पीएम मोदी ने ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच निर्यात, रक्षा और आत्मनिर्भरता पर जोर देकर भारत की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की रणनीति पेश की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों से भारत की अर्थव्यवस्था को बचाने की रणनीति अब और स्पष्ट होती नजर आ रही है। रविवार को पेश किए गए वार्षिक केंद्रीय बजट में सरकार ने उन क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया है, जो अमेरिकी शुल्कों से प्रभावित हुए हैं, विशेषकर निर्यात उद्योग और रणनीतिक क्षेत्र।
बजट में बुनियादी ढांचे पर नए खर्च और रक्षा बजट में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया है। इसे चीन और पाकिस्तान जैसे दोहरे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से निपटने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही दुर्लभ खनिज, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई है।
हालांकि इन प्रावधानों के बावजूद सरकार ने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए कर्ज लक्ष्यों से ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की। इस साल बजट में व्यापक कर कटौती से परहेज किया गया है और बड़े खर्चीले एलानों से भी दूरी रखी गई है, खासकर ऐसे समय में जब कई अहम राज्यों में चुनाव होने हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपने 90 मिनट के बजट भाषण में कहा कि भारत ऐसे वैश्विक माहौल का सामना कर रहा है, जहां व्यापार और बहुपक्षीय सहयोग खतरे में हैं तथा आपूर्ति शृंखलाएं बाधित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों के बावजूद भारत को वैश्विक बाजारों से गहराई से जुड़ा रहना होगा, निर्यात बढ़ाना होगा और दीर्घकालिक निवेश आकर्षित करना होगा।
हालांकि बजट में ट्रंप प्रशासन का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन अगस्त से लागू 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ—जो रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाए गए हैं—का प्रभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। इन शुल्कों से कपड़ा और फर्नीचर जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों को नुकसान पहुंचा है।
सरकार की रणनीति आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की भी है। पिछले वर्ष उपभोग करों में कटौती, श्रम कानूनों में सुधार और परमाणु व वित्तीय क्षेत्रों को निवेश के लिए खोलना इसी दिशा के कदम हैं। साथ ही, भारत ने यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते कर अमेरिकी दबाव को संतुलित करने की कोशिश की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने का प्रयास है, हालांकि रोजगार सृजन और विकास को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।
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