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प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट के साथ दो दिवसीय चिंतन शिविर आज से, 2047 तक विकसित भारत का रोडमैप एजेंडे में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दो दिवसीय चिंतन शिविर में सरकारी योजनाओं की समीक्षा होगी। बैठक में 2047 तक विकसित भारत के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ की शुरुआत करेंगे। इस दौरान सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में चल रहे कार्यों की समीक्षा की जाएगी और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के तहत आगे की प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में सरकार की मौजूदा योजनाओं और पहलों की प्रगति का जायजा लिया जाएगा। साथ ही विकास की दिशा में नए विचारों, सुधारों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी।

‘विकसित भारत’ के लिए यह प्रक्रिया 2021 से जारी है। इसके तहत सचिवों के 10 क्षेत्रीय समूह बनाए गए थे, जिन्हें ‘विजन@2047’ दस्तावेज और अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक रोडमैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस प्रक्रिया में विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श भी किया गया है। अब तक केंद्रीय मंत्रिपरिषद विकसित भारत@2047 के अलग-अलग पहलुओं पर आठ प्रस्तुतियां या चर्चाएं कर चुकी है।

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चिंतन शिविर में क्या होगा?

23 और 24 सितंबर को होने वाले इस चिंतन शिविर में सचिवों के समूहों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय तथा नीति आयोग द्वारा किए गए कार्यों को एक साथ रखकर चर्चा की जाएगी। इसमें प्रशासनिक सुधार, जीवन सुगमता, अनुपालन कम करना और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताएं शामिल होंगी।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक एक बार का कार्यक्रम नहीं होगा। आने वाले दिनों में भी इस विषय पर चर्चा के और दौर आयोजित किए जा सकते हैं।

सप्तधारा’ में सात प्रमुख क्षेत्र

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सप्तधारा’ के तहत विकास के सात प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया था। इनमें विनिर्माण, कृषि एवं खाद्य सुरक्षा, तकनीक एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, हरित ऊर्जा और सॉफ्ट पावर शामिल हैं।

विनिर्माण के क्षेत्र में भारत को तैयार उत्पाद बनाने पर जोर देने की बात कही गई। कृषि और खाद्य सुरक्षा को आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। तकनीक एवं नवाचार के तहत डेटा सेंटर, रोबोटिक्स और उभरती तकनीकों में क्षमता बढ़ाने पर जोर है।

‘गति शक्ति’ के तहत सड़क, राजमार्ग और एक्सप्रेसवे जैसे बुनियादी ढांचे पर ध्यान दिया जाएगा। ‘रक्षा शक्ति’ में घरेलू रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता, जबकि हरित ऊर्जा में स्वच्छ ऊर्जा तकनीक को बढ़ावा देने की बात है। सॉफ्ट पावर के तहत योग, हस्तशिल्प, फिल्म, एनीमेशन, गेमिंग और डिजिटल सामग्री को भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच का हिस्सा बताया गया है।

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