महात्मा गांधी की 157वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी श्रद्धांजलि, शांति और अहिंसा को बताया प्रासंगिक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी की 157वीं जयंती की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने वैश्विक संघर्षों के बीच गांधीजी के शांति और अहिंसा संदेश को प्रासंगिक बताया।
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच महात्मा गांधी का शांति और अहिंसा का संदेश आज भी बेहद प्रासंगिक है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और मानवता के मूल्यों के माध्यम से दुनिया को एक नई दिशा दिखाई। उनका जीवन और विचार केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि गांधीजी ने समाज में समानता, सद्भाव और न्याय की स्थापना के लिए लगातार प्रयास किया। उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों को महत्व दिया तथा लोगों से सादगी, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी अपनाने का आह्वान किया।
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राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और हिंसा जारी है, तब गांधीजी के शांति और अहिंसा के सिद्धांतों की उपयोगिता और बढ़ जाती है। उनके विचार लोगों को संवाद, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता दिखाते हैं।
उन्होंने देशवासियों से महात्मा गांधी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि गांधीजी का सपना एक ऐसे समाज का था, जहां सभी लोगों के साथ समान व्यवहार हो और मानव गरिमा का सम्मान किया जाए।
2 अक्टूबर को देशभर में महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। यह दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में राष्ट्रीय पर्व के तौर पर मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र भी 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाता है।
महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और बाद में विश्वभर के अनेक आंदोलनों को भी प्रभावित किया।