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राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान: राष्ट्रपति ने गांधी और नेहरू का किया स्मरण

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद में गांधी-नेहरू का स्मरण करते हुए सांसदों से राष्ट्रीय सुरक्षा, विकसित भारत और स्वदेशी जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर राष्ट्रहित में काम करने की अपील की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार (28 जनवरी, 2026) को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए सांसदों से राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर एकजुट होकर कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, ‘विकसित भारत’ के संकल्प और ‘स्वदेशी’ अभियान जैसे विषयों पर सभी जनप्रतिनिधियों से एक स्वर में खड़े होने की अपील की। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार सामाजिक न्याय की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए “सुधार एक्सप्रेस” को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ-साथ सरदार वल्लभभाई पटेल, जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे महान नेताओं का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि इन सभी नेताओं की सोच अलग-अलग रही है, लेकिन एक बात पर हमेशा सहमति रही कि राष्ट्र से बड़ा कुछ भी नहीं है।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद और विभिन्न दृष्टिकोण स्वाभाविक हैं, लेकिन कुछ विषय ऐसे होते हैं जो राजनीति से ऊपर होते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, स्वदेशी को बढ़ावा, राष्ट्रीय एकता और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर संसद के सभी सदस्यों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट रहना चाहिए।

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उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और गरीब, वंचित तथा पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने सांसदों से आग्रह किया कि वे संविधान की भावना के अनुरूप राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं और देश की प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करें।

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