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प्रियंका गांधी का आरोप: अनुचित चुनाव कराने पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो आपराधिक कार्रवाई

प्रियंका गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि गैरकानूनी कार्रवाई साबित होने पर आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए।

वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी चुनाव अधिकारी ने ‘अनुचित’ चुनाव होने दिया है तो उसके खिलाफ देशद्रोह के तहत आपराधिक मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

प्रियंका गांधी ने कहा कि चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से किसी भी तरह का खिलवाड़ देश के खिलाफ गंभीर अपराध है। उन्होंने मतदाता सूची में कथित छेड़छाड़ और 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र, संविधान और देश के खिलाफ आपराधिक कृत्य बताया।

सीईसी पर लगाए गंभीर आरोप

प्रियंका गांधी ने कहा कि जो भी व्यक्ति चुनाव की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से छेड़छाड़ करता है, वह देश के साथ विश्वासघात कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने गैरकानूनी काम किया है तो उसे कानूनी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

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उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को कथित अनियमितताओं की जानकारी थी और उनके सहयोगियों ने भी इस संबंध में उन्हें अवगत कराया था। इसके बावजूद, उनके अनुसार, कार्रवाई नहीं की गई और ‘अनुचित’ चुनाव होने दिया गया। प्रियंका गांधी ने कहा कि ऐसी स्थिति में सीईसी के खिलाफ भी अन्य आरोपियों की तरह आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि साबित होती है तो उन्हें उपलब्ध कानूनी सुरक्षा किस हद तक लागू होनी चाहिए।

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर दी सफाई

प्रियंका गांधी की यह टिप्पणी उस राजनीतिक विवाद के बीच आई है, जो एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची की प्रक्रिया और एसआईआर से जुड़े फैसलों एवं आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद की किसी धारणा को खारिज किया है। आयोग ने कहा कि लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी आपत्तियां और आंतरिक जांच एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, ऐसी प्रक्रियाएं उसके कामकाज को कमजोर नहीं करतीं।

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