रवीन्द्र जयंती 2026: क्यों 7 और 9 मई को अलग-अलग मनाई जा रही है रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती?
रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती 2026 में 7 और 9 मई को मनाई जा रही है। इसका कारण ग्रेगोरियन और बंगाली कैलेंडर का अंतर है, जिससे दो तिथियां बनती हैं।
हर वर्ष रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती भारत और दुनिया भर में संगीत, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाई जाती है। स्कूलों में कार्यक्रम होते हैं, साहित्य प्रेमी उनकी रचनाओं को फिर से पढ़ते हैं और बंगाली परिवार अक्सर इस दिन रवीन्द्र संगीत में डूब जाते हैं।
लेकिन हर साल एक सवाल लोगों को भ्रमित करता है कि उनकी जयंती दो अलग-अलग तिथियों—7 मई और 9 मई—को क्यों मनाई जाती है। 2026 में यह अंतर और भी स्पष्ट हो जाता है।
इसका मुख्य कारण दो अलग-अलग कैलेंडर प्रणालियां हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार रवीन्द्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोरासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। इसलिए भारत सरकार और कई संस्थान उनकी जयंती 7 मई को मनाते हैं।
लेकिन बंगाली परंपरा के अनुसार टैगोर का जन्म बंगाली पंचांग के अनुसार बोइशाख महीने के 25वें दिन हुआ था, जिसे “पंचिशे बोइशाख” कहा जाता है। बंगाल और बांग्लादेश में यह तिथि अधिक सांस्कृतिक महत्व रखती है।
बंगाली कैलेंडर सौर गणना पर आधारित होता है, इसलिए इसकी तिथियां हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर से मेल नहीं खातीं। 2026 में पोइला बोइशाख (बंगाली नववर्ष) 15 अप्रैल को पड़ा। इसके आधार पर 25 दिन गिनने पर पंचिशे बोइशाख 9 मई को आता है।
इसी कारण पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और बांग्लादेश में बड़े स्तर पर रवीन्द्र जयंती 9 मई को मनाई जा रही है, जबकि अन्य जगह 7 मई को आधिकारिक रूप से इसे मनाया जाता है।
2026 में यह टैगोर की 165वीं जयंती है। वे “गुरुदेव” और “कबिगुरु” के नाम से प्रसिद्ध थे। उनकी रचनाओं में “गीतांजलि”, रवीन्द्र संगीत और भारत व बांग्लादेश के राष्ट्रगान शामिल हैं। उन्होंने शांतिनिकेतन में विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना भी की।
तिथियों का अंतर होने के बावजूद इस दिन का संदेश एक ही रहता है—टैगोर के विचार, मानवता, रचनात्मकता और स्वतंत्र सोच को सम्मान देना।
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