छात्रों की भूख हड़ताल खत्म होने पर राहुल गांधी बोले- सवाल उठाएं तो जवाब मिलना चाहिए
राहुल गांधी ने झारखंड के छात्रों की भूख हड़ताल खत्म होने का स्वागत किया। उन्होंने संवाद को समाधान का सही रास्ता बताया और निष्पक्ष प्रतियोगिता तथा भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की।
‘जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए’: झारखंड के छात्रों की भूख हड़ताल खत्म होने पर राहुल गांधी ने जताई खुशी
राहुल गांधी ने कहा, “यही सही रास्ता है—जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए। हम देश के हर छात्र के साथ खड़े हैं। हम इस भर्ती व्यवस्था को पूरी तरह बदलेंगे और इसमें सुधार करेंगे, ताकि हर छात्र को अपनी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतियोगिता का अधिकार मिल सके।”
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों की भूख हड़ताल खत्म होने का स्वागत किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा संवाद का रास्ता अपनाकर समाधान तक पहुंचने की सराहना की। कांग्रेस नेता ने कहा, “यही सही रास्ता है—जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए। हम देश के हर छात्र के साथ खड़े हैं। हम इस भर्ती व्यवस्था को पूरी तरह बदलेंगे और इसमें सुधार करेंगे, ताकि हर छात्र को अपनी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतियोगिता का अधिकार मिल सके।” उन्होंने आगे कहा, “पूरे देश में यह व्यवस्था बदलेगी—अब ऐसा ढांचा तैयार किया जाएगा जो छात्रों को पीछे रोकने के बजाय उन्हें आगे बढ़ाएगा।”
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा और वर्ष 2014 से आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल द्वारा कराई गई सभी नौकरी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। यह फैसला सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की लंबी बैठक में लिया गया। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सोरेन ने कहा, “सरकार ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय (जेएसएससी-सीजीएल) परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है, जो प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक थी। हमने आउटसोर्स एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी परिणामों को भी रद्द करने का फैसला किया है।” उन्होंने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति गठित करने की भी घोषणा की।
आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, लेकिन स्पष्ट किया कि भूख हड़ताल खत्म होने का मतलब व्यापक सुधार आंदोलन का अंत नहीं है। सोरेन की घोषणा के बाद महतो ने कहा कि छात्र भर्ती व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार की जांच और उसे दूर करने के प्रयासों में सहयोग जारी रखेंगे। महतो ने कहा, “हम छात्र इस जांच और इस भ्रष्ट व्यवस्था को जड़ से खत्म करने के प्रयास का समर्थन जारी रखेंगे और चल रही सुधार प्रक्रिया को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेंगे... यदि हमारी समस्याओं का समाधान हो जाता है और हमारी मांगें पूरी हो जाती हैं, तो हमें आगे विरोध प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों होगी? हम फिलहाल आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं।”
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