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नेशनल हेराल्ड मामले में राहुल-सोनिया गांधी का दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब, ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल

राहुल और सोनिया गांधी ने नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में जवाब दाखिल कर ईडी की कार्रवाई, जांच प्रक्रिया और याचिका की वैधता पर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष अपना लिखित जवाब दाखिल किया है। दोनों ने आरोप लगाया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के पीछे बाहरी विचारों” से प्रभावित होने जैसे कारण रहे हैं।

गांधी परिवार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि यह देश का ऐसा मामला है, जिसमें ईडी ने एक निजी शिकायत के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। राहुल और सोनिया गांधी ने दावा किया कि ईडी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की 2014 में दायर निजी शिकायत के आधार पर ईसीआईआर दर्ज की, जबकि कानून के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता।

दोनों नेताओं के अनुसार, ईडी खुद लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तब तक शुरू नहीं हो सकती, जब तक किसी अनुसूचित अपराध या मूल अपराध के संबंध में एफआईआर दर्ज न हो।

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जवाब में कहा गया कि स्वामी की शिकायत 2014 में दाखिल हुई थी, लेकिन ईडी ने उस समय ईसीआईआर दर्ज नहीं की। एजेंसी ने करीब सात साल बाद 30 जून 2021 को ईसीआईआर दर्ज की। गांधी नेताओं ने इस देरी को अपने तर्क के समर्थन में पेश करते हुए कहा कि इससे संकेत मिलता है कि ईडी भी मानता था कि केवल निजी शिकायत के आधार पर पीएमएलए के तहत कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।

नेशनल हेराल्ड मामला सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और गांधी परिवार से जुड़ी कंपनी यंग इंडियन पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और संपत्ति के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए थे।

15 अप्रैल 2025 को ईडी ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की। हालांकि, 16 दिसंबर 2025 को ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामला एफआईआर पर नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के समक्ष निजी शिकायत पर आधारित था।

अगले ही दिन ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। राहुल और सोनिया गांधी ने इसे एजेंसी की “असाधारण दिलचस्पी” और “अनुचित जल्दबाजी” बताया तथा ईडी की याचिका खारिज करने की मांग की।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सचिन दत्ता के समक्ष हुई। अदालत ने सुनवाई 12 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।

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