राम मंदिर दान चोरी मामला: एसआईटी रिपोर्ट में चंपत राय की भूमिका पर गंभीर सवाल
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी रिपोर्ट ने चंपत राय पर लापरवाही और शिकायतों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। कई करीबी लोगों की संलिप्तता भी सामने आई है।
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कई शिकायतों को नजरअंदाज किया और दान गिनती व निगरानी की जिम्मेदारी अन्य लोगों को सौंप दी थी।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार किए गए अधिकतर आरोपी या तो चंपत राय के करीबी थे या उनकी सिफारिश पर नियुक्त किए गए थे। इसी विवाद के बाद चंपत राय ने शुक्रवार को महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया।
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच सीसीटीवी फुटेज में लगभग 40 दिनों में करीब 70 बार मंदिर के दान कक्ष से नकदी चोरी की घटनाएं देखी गईं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि दान गिनती में शामिल कर्मचारियों की नियुक्ति चंपत राय और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर की गई थी।
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रिपोर्ट के अनुसार, चंपत राय ने स्वयं निगरानी और दान गिनती का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं रखा, बल्कि यह जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को सौंप दी थी। उन पर यह भी आरोप है कि कई बार शिकायत मिलने के बावजूद उन्होंने पुलिस को सूचित नहीं किया।
एसबीआई से जुड़े कर्मचारियों सहित आठ लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। इनमें केवल टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी थे, जबकि अन्य बैंक से जुड़े थे।
एसआईटी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुख्य आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव को दान कक्ष की चाबियों और प्रशासनिक फैसलों पर काफी नियंत्रण था। वह कर्मचारियों की नियुक्ति और पुलिस तैनाती तक में भूमिका निभाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ आरोपियों ने सीसीटीवी कैमरों को बंद कर या उनकी दिशा बदलकर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया। हालांकि एक छिपे हुए कैमरे की फुटेज से पूरा मामला उजागर हुआ।
फिलहाल यह आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं और न ही चंपत राय या अनिल मिश्रा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है।
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