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राम मंदिर गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट से डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने की मांग, वकील बोले- देरी से मिट सकते हैं अहम साक्ष्य

राम मंदिर गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट से सीसीटीवी, डीवीआर और डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई। याचिकाकर्ता ने चेताया कि देरी से अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट से डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है। सोमवार (29 जून) को ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान एक बार फिर शीर्ष अदालत ने इस मामले में तत्काल सुनवाई का आश्वासन नहीं दिया। इस बीच याचिकाकर्ता और अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने अदालत के समक्ष दलील दी कि यदि समय रहते डिजिटल सबूत सुरक्षित नहीं किए गए तो वे हमेशा के लिए नष्ट हो सकते हैं।

अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मौखिक उल्लेख (ओरल मेंशनिंग) करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने उन्हें बताया है कि इस याचिका पर ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद, यानी 12 जुलाई के बाद ही सुनवाई होगी।

गोस्वामी ने अदालत से कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पत्थर पर लिखे शिलालेख की तरह स्थायी नहीं होते। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज, डीवीआर रिकॉर्डिंग, डिजिटल भुगतान का डेटा और प्रवेश संबंधी रिकॉर्ड समय के साथ अपने आप ओवरराइट, डिलीट या खराब हो सकते हैं। ऐसे में यदि इन साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के आदेश में देरी होती है, तो यह न्याय से वंचित करने जैसा होगा।

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उन्होंने कहा कि सीसीटीवी सिस्टम अदालत की छुट्टियों का इंतजार नहीं करता और न ही डिजिटल रिकॉर्ड किसी सुनवाई की तारीख का पालन करते हैं। इसलिए इस मामले में सबसे पहले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को संरक्षित करने के निर्देश दिए जाने चाहिए।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में प्राप्त दान के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ता ने निष्पक्ष जांच के साथ-साथ सभी डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान कोई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट न हो सके।

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