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परिसीमन का विरोध करना महिलाओं के खिलाफ रुख: रामदास अठावले

रामदास अठावले ने कहा कि परिसीमन का विरोध महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ है। उनके अनुसार महिला आरक्षण और सीटों में वृद्धि केवल परिसीमन से ही संभव है।

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने गुरुवार को परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करने वालों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करना सही नहीं है और इसे महिलाओं के खिलाफ रुख अपनाने जैसा माना जा सकता है।

रामदास अठावले ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से अधिक सशक्त बनाने और संसद व विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य केवल परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि देश में सीटों का पुनर्निर्धारण नहीं किया गया तो महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करना मुश्किल होगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को समान अवसर देना और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी दिलाना है। इसके लिए परिसीमन एक आवश्यक कदम है, जिसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित में देखा जाना चाहिए।

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केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे इस मुद्दे पर अनावश्यक राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध विकास और सामाजिक न्याय के रास्ते में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

अठावले ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस विषय पर सकारात्मक सोच अपनाएं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन करें।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है कि अधिक से अधिक महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिले और यह तभी संभव है जब संसदीय सीटों का उचित पुनर्निर्धारण किया जाए।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विभिन्न दलों के बीच मतभेद देखने को मिल रहे हैं।

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