विशाखापत्तनम के तट पर व्हेल शार्क का दुर्लभ दीदार, स्कूबा डाइवर्स रोमांचित
विशाखापत्तनम के चिन्ना ऋषिकोंडा तट पर स्कूबा डाइवर्स ने 10 मीटर लंबी संकटग्रस्त व्हेल शार्क को देखा, जो एक दुर्लभ और रोमांचक समुद्री अनुभव रहा।
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम तट के पास चिन्ना ऋषिकोंडा क्षेत्र में रविवार (18 जनवरी, 2026) की सुबह स्कूबा डाइविंग कर रहे गोताखोरों को समुद्री जीवन का एक दुर्लभ और यादगार नज़ारा देखने को मिला। डाइव अड्डा (Dive Adda) से जुड़े स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षकों की एक टीम ने पानी के भीतर एक विशाल व्हेल शार्क को देखा, जिससे गोताखोरों में उत्साह और रोमांच फैल गया।
यह दृश्य उस समय सामने आया जब स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षक दो छात्रों के साथ नियमित डाइविंग सत्र पूरा कर वापस लौट रहे थे। उसी दौरान समुद्र की गहराई में अचानक दुनिया की सबसे बड़ी मछली प्रजाति व्हेल शार्क दिखाई दी। गोताखोरों के अनुसार, यह अनुभव बेहद शांत और अविस्मरणीय रहा।
व्हेल शार्क को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। देखी गई व्हेल शार्क की लंबाई लगभग 10 मीटर आंकी गई। गोताखोरों ने बताया कि यह विशाल लेकिन शांत स्वभाव वाली मछली मछलियों के एक झुंड का पीछा करते हुए धीरे-धीरे तैर रही थी।
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व्हेल शार्क के शांत व्यवहार के कारण गोताखोरों को कुछ समय तक उसके काफी नज़दीक रहकर उसे देखने का अवसर मिला। पानी के भीतर यह दृश्य बेहद दुर्लभ होता है और आमतौर पर बहुत कम लोगों को ऐसा अनुभव मिल पाता है।
समुद्री जीव विशेषज्ञों के अनुसार, व्हेल शार्क का इस तरह दिखाई देना समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। साथ ही यह घटना समुद्री जैव विविधता के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
स्थानीय गोताखोर समुदाय ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि इस तरह के अनुभव लोगों में समुद्री जीवन के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना को और मजबूत करते हैं।
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