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आरबीआई एमपीसी बैठक: रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, महंगाई और विकास के संतुलन पर जोर

आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखा। महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास के संतुलन पर जोर दिया गया, जबकि भविष्य में दर कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया गया।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को यह घोषणा करते हुए कहा कि समिति ने मौद्रिक नीति का रुख “तटस्थ” बनाए रखने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता रहेगा।

सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई को 4 प्रतिशत पर बनाए रखा जाए, जिसमें 2 प्रतिशत का ऊपर-नीचे का दायरा निर्धारित किया गया है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आरबीआई लगातार नीतिगत कदम उठा रहा है।

यह तीन दिवसीय बैठक ऐसे समय में आयोजित हुई है जब हाल ही में विकास-केंद्रित केंद्रीय बजट पेश किया गया और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा हुई, जिससे बाजार की धारणा में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई ने पिछले वर्ष फरवरी से अब तक प्रमुख अल्पकालिक उधार दर यानी रेपो रेट में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। इसलिए फिलहाल विकास और महंगाई दोनों मोर्चों पर कोई बड़ा दबाव नहीं होने के कारण दरों को स्थिर रखना उचित समझा गया।

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हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उधारी की लागत को और कम करने के लिए केंद्रीय बैंक भविष्य में एक और दर कटौती कर सकता है। एसबीआई की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, पिछली एमपीसी बैठक के बाद यूरोपीय संघ-भारत और अमेरिका-भारत व्यापार समझौतों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं, जिनके तहत भारत में आयात शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।

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