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सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अधिकारी ने USCIRF रिपोर्ट पर सवाल उठाए, RSS और RAW पर प्रतिबंध की सिफारिश का विरोध किया

सेवानिवृत्त न्यायाधीश और अधिकारी USCIRF की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए RSS और RAW पर प्रतिबंध की सिफारिश का विरोध कर सही तथ्यों पर आधारित विश्लेषण की मांग कर रहे हैं।

हाल ही में प्रकाशित अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट, जो भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और रॉ (RAW) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करती है, पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और उच्च पदस्थ अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने रिपोर्ट की सटीकता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए इसे एकतरफा बताया।

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और अधिकारियों का कहना है कि USCIRF (यूएस कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजनल फ्रीडम) की रिपोर्ट राजनीतिक और संवेदी दृष्टिकोण से प्रभावित है और इसमें तथ्यों का विकृत प्रस्तुतिकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज की संरचना के संदर्भ में इस प्रकार के निष्कर्ष जनता और अधिकारियों के लिए भ्रम पैदा कर सकते हैं।

विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने यह भी कहा कि आरएसएस और रॉ जैसी संस्थाएं भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने रिपोर्ट को भारत की आंतरिक नीतियों और संवैधानिक ढांचे में हस्तक्षेप करने की कोशिश बताया।

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उन्होंने सरकार और नागरिक समाज से अपील की कि वे इस तरह की रिपोर्टों को गंभीरता से परखें और तथ्यात्मक विश्लेषण के बिना निर्णय न लें। अधिकारियों ने कहा कि विदेशी रिपोर्टों पर आधारित निष्कर्ष राष्ट्रीय संस्थाओं की छवि पर अनुचित असर डाल सकते हैं।

इस मुद्दे पर चर्चा में यह स्पष्ट हुआ कि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के निष्कर्ष हमेशा भारत की आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उनका निष्पक्ष मूल्यांकन आवश्यक है।

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