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एमपीएससी पेपर लीक मामले में ऋतुजा पाटिल कोर्ट में पेश, तीन दिन की पुलिस हिरासत; अन्य आरोपियों की कस्टडी 5 दिन बढ़ी

एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में ऋतुजा पाटिल को तीन दिन की पुलिस हिरासत मिली है। अन्य आरोपियों की कस्टडी पांच दिन बढ़ाई गई है।

महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में गिरफ्तार ऋतुजा पाटिल को बुधवार को अदालत में पेश किया गया। गिरफ्तारी के एक दिन बाद हुई सुनवाई में अदालत ने ऋतुजा पाटिल को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। वहीं, मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पुलिस हिरासत पांच दिन के लिए बढ़ा दी गई। अदालत में पेशी के दौरान ऋतुजा पाटिल भावुक भी हो गईं।

पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी एमपीएससी अधिकारी विश्वेश्वर दत्तात्रेय नाकाटे ने कथित तौर पर पेपर लीक में इस्तेमाल लैपटॉप को सबूत नष्ट करने के इरादे से खाड़ी में फेंक दिया था। पुलिस ने लैपटॉप बरामद कर लिया है और उसमें मौजूद डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

जांच के दौरान कौटिल्य क्लासेस के संचालक और आरोपी प्रवीण दिलीप पाटिल के घर से वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के लिए सात दिन की हिरासत मांगी थी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और ऋतुजा पाटिल समेत आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ जरूरी है।

और पढ़ें: एमपीएससी ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक मामले में अभ्यर्थी रितुजा पाटिल गिरफ्तार, अब तक सात आरोपी पकड़े गए

जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप

पुलिस ने अदालत को बताया कि आरोपी पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे हैं और सवालों के सीधे तथा संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने ऋतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में लिया था।

पुलिस के अनुसार, ऋतुजा ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र हासिल किया था। आरोप है कि उन्हें संदेह से बचने के लिए जानबूझकर 10 सवाल गलत करने की सलाह दी गई थी।

छह आरोपियों की हुई थी गिरफ्तारी

पिछले सप्ताह क्राइम ब्रांच ने 22 मार्च को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एमपीएससी के सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर नाकाटे और गोपाल भट्टू मराठे, अवर सचिव अभिजीत गणपतराव लेंडे, प्रवीण पाटिल तथा कथित सह-साजिशकर्ता अमृत नामदेव पाटिल और लोकेश उर्फ गौरव राजेंद्र पाटिल शामिल हैं।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपियों ने परीक्षा से पहले प्रश्नों तक कथित पहुंच बनाई, उनका अलग सेट तैयार किया और अनधिकृत लोगों तक पहुंचाया।

यह परीक्षा महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। पेपर की गोपनीयता भंग होने की पुष्टि के बाद एमपीएससी ने भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी और नए सिरे से परीक्षा कराने की घोषणा की।

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