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सेफ हार्बर का हवाला देकर X सहयोग पोर्टल से नहीं बच सकता: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सेफ हार्बर के बावजूद X को सहयोग पोर्टल से जुड़ना होगा। कोर्ट ने आपराधिक जांच में तेजी और पुलिस को समय पर जानकारी देने की जरूरत पर जोर दिया।

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) को आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा उसे सरकार के सहयोग पोर्टल से जुड़ने से छूट नहीं देती। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक जांच में तेजी लाने और पुलिस को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्लेटफॉर्म का सहयोग जरूरी है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की बेंच X कॉर्प की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कंपनी ने पुलिस को जानकारी देने में देरी से जुड़े मामलों में चल रही कार्यवाही से राहत की मांग की थी। सुनवाई के दौरान X ने कहा कि सहयोग पोर्टल से जुड़ने के खिलाफ उसकी याचिका कर्नाटक हाई कोर्ट में लंबित है।

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि सेफ हार्बर का मतलब यह नहीं है कि कोई प्लेटफॉर्म अपराध से जुड़े मामलों में सहयोग से इंकार कर दे। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा कानून किसी भी प्लेटफॉर्म को आपराधिक जांच में शामिल होने से मना करने की अनुमति नहीं देता।

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आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म को तीसरे पक्ष के कंटेंट के लिए सीमित दायित्व से सुरक्षा मिलती है, लेकिन अदालत ने जोर देकर कहा कि इस सुरक्षा का उपयोग जांच में बाधा डालने या सूचना साझा करने में देरी के लिए नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि देश के हर पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारी के लिए 30–40 अलग-अलग प्लेटफॉर्म से जानकारी मांगना संभव नहीं है, इसलिए एक केंद्रीकृत पोर्टल आवश्यक है। कई देशों में ऐसे सिस्टम पहले से लागू हैं।

सरकार के अनुसार साहयोग पोर्टल आईटी एक्ट 2000 के तहत नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए बनाया गया है। यह पोर्टल गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने में मदद करता है।

यह मामला एक महिला की हैबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उसने 10 जनवरी 2024 से लापता अपने 19 वर्षीय बेटे को पेश करने की मांग की थी। कोर्ट ने पुलिस और प्लेटफॉर्म के बीच जानकारी साझा करने में देरी पर चिंता जताई। सरकार ने बताया कि 60 से अधिक इंटरमीडियरी पहले ही साहयोग पोर्टल से जुड़ चुके हैं।

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