सहारनपुर में मस्जिद के नीचे मिला कुआं कितना पुराना? एएसआई ने निरीक्षण के बाद दी अहम जानकारी
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्त मस्जिद के नीचे मिला ढांचा करीब 200 से 300 वर्ष पुराना बताया गया है। एएसआई ने खुदाई के बाद वास्तविक इतिहास स्पष्ट होने की बात कही।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्त की गई मस्जिद के मलबे के नीचे मिले कुएं को लेकर इतिहास और पुरातात्विक महत्व पर चर्चा तेज हो गई है। करीब 20 फीट गहरे और 1.5 मीटर चौड़े इस ढांचे की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने जांच की।
रविवार को मलबा हटाने के दौरान यह ढांचा सामने आया था। इसके बाद सोमवार को एएसआई की टीम मौके पर पहुंची। टीम के एक अधिकारी मनोज कुमार यादव ने सीढ़ी के जरिए कुएं के अंदर जाकर उसकी प्रारंभिक जांच की।
निरीक्षण के बाद मनोज कुमार यादव ने बताया कि यह ढांचा करीब 200 से 300 वर्ष पुराना प्रतीत होता है। इससे संकेत मिलता है कि यह मस्जिद के निर्माण से भी पहले का हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी इसे निश्चित रूप से कुआं या कोई अन्य संरचना नहीं कहा जा सकता।
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एएसआई के अनुसार, इसकी वास्तविक प्रकृति, उम्र और इतिहास का पता विस्तृत खुदाई के बाद ही चल सकेगा। प्रशासन आवश्यक अनुमति मिलने के बाद इसकी खुदाई करा सकता है। प्रारंभिक तौर पर इस संरचना को उत्तर-मध्यकालीन काल का माना जा रहा है।
मस्जिद समिति के मुतवल्ली ने दावा किया कि यह कुआं मस्जिद में वुजू के लिए इस्तेमाल किया जाता था और लंबे समय से परिसर में मौजूद था।
अदालत के आदेश के बाद मस्जिद ढहाई गई
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को 5 सितंबर को नगर मजिस्ट्रेट के आदेश और बाद में जिला अदालत के फैसले के बाद ध्वस्त किया गया। जिला जज सत्येंद्र कुमार ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज करते हुए नगर मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। आदेश में विवादित जमीन को सरकारी संपत्ति माना गया था।
इसके बाद प्रशासन ने रात में मस्जिद को सील कर दिया और अगले दिन उस हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की, जिसे सरकारी जमीन पर निर्मित बताया गया था।
मामले के शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व संयोजक विकास त्यागी ने दावा किया था कि मस्जिद बनने से पहले इस स्थान पर मंदिर हो सकता है। उन्होंने 2025 में नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर कर परिसर में बने ढांचे को अवैध बताया था। जिला अदालत ने 2 सितंबर को मस्जिद प्रबंधन समिति की अपील भी खारिज कर दी।
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