सुप्रीम कोर्ट से ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ को राहत, CCI का 301.6 करोड़ रुपये का जुर्माना रद्द करने का NCLAT का फैसला बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ पर CCI के 301.6 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने वाले NCLAT के फैसले को बरकरार रखते हुए मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ को बड़ी राहत देते हुए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 301.6 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द करने वाले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के फैसले को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने CCI को निर्देश दिया कि वह मामले की दोबारा सुनवाई करे और कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दे।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और के. विनोद चंद्रन की पीठ ने CCI की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 5 मई को NCLAT द्वारा दिए गए आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अपीलीय न्यायाधिकरण का आदेश विधिसम्मत है।
NCLAT ने अपने फैसले में कहा था कि CCI ने अपने जांच प्रकोष्ठ महानिदेशक (DG) की रिपोर्ट से अलग निष्कर्ष निकालने के बावजूद ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ को अपनी सफाई देने का अवसर नहीं दिया। न्यायाधिकरण के अनुसार, यदि आयोग DG की रिपोर्ट से अलग राय बनाता है तो संबंधित पक्ष को नोटिस देकर सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।
मार्च 2020 में CCI ने आरोप लगाया था कि ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ ने भारत में विस्कोस स्टेपल फाइबर (VSF) की आपूर्ति के बाजार में अपनी प्रमुख स्थिति का दुरुपयोग किया। आयोग के अनुसार, कंपनी ने ग्राहकों से भेदभावपूर्ण मूल्य वसूले और उन पर अतिरिक्त शर्तें भी लागू कीं। इसी आधार पर 301.6 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
ग्रासिम इंडस्ट्रीज़ ने इस आदेश को NCLAT में चुनौती दी थी। अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि आयोग ने DG की रिपोर्ट से अलग निष्कर्ष निकालते समय कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया, जिससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ।
NCLAT ने CCI का आदेश रद्द करते हुए मामले को आयोग के पास वापस भेज दिया और निर्देश दिया कि जहां भी आयोग DG की रिपोर्ट से अलग राय बनाए, वहां संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिया जाए तथा मामले का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाए। न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है और CCI स्वतंत्र रूप से नए सिरे से निर्णय ले सकता है।
यह मामला एसोसिएशन ऑफ मैन मेड फाइबर इंडस्ट्री ऑफ इंडिया, ग्रासिम इंडस्ट्रीज़, थाई रेयॉन और इंडो भारत रेयॉन के खिलाफ दर्ज शिकायत से जुड़ा है। इनमें ग्रासिम, थाई रेयॉन और इंडो भारत रेयॉन आदित्य बिड़ला समूह की कंपनियां हैं। मामला VSF बाजार में कथित अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन से संबंधित है।
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