डीजीपी नियुक्ति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने डीजीपी नियुक्ति में राज्यों की देरी पर नाराजगी जताते हुए UPSC को निर्देश दिया कि समय पर प्रस्ताव सुनिश्चित करे और तेलंगाना के लिए चार सप्ताह में सिफारिश करे।
सुप्रीम कोर्ट ने कई राज्यों द्वारा पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजने में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार (5 फरवरी 2026) को सुनवाई के दौरान अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को ऐसे मामलों को सीधे उसके संज्ञान में लाने की अनुमति दी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने तेलंगाना में डीजीपी नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने के लिए UPSC को चार सप्ताह के भीतर बैठक बुलाकर सिफारिश करने का निर्देश दिया। तेलंगाना में नियमित डीजीपी 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे, जिसके बाद से स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह मामले में दिए गए अपने निर्देशों को दोहराया, जिसमें पुलिस सुधारों के तहत डीजीपी चयन के स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए थे। इन निर्देशों के अनुसार, UPSC द्वारा तैयार पैनल में शामिल तीन वरिष्ठतम आईपीएस अधिकारियों में से डीजीपी का चयन किया जाना चाहिए और उन्हें कम से कम दो साल का निश्चित कार्यकाल दिया जाना अनिवार्य है।
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UPSC ने अदालत को बताया कि राज्यों की देरी के कारण कई वरिष्ठ और योग्य अधिकारियों को डीजीपी पद के लिए विचार का मौका नहीं मिल पाता। कई राज्य नियमित नियुक्ति की बजाय कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त कर रहे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी है।
अदालत ने UPSC को निर्देश दिया कि वह राज्यों को समय पर प्रस्ताव भेजने के लिए पत्र लिखे और यदि राज्य देरी करें तो प्रकाश सिंह मामले में अदालत में आवेदन दायर करे।
यह मामला तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली UPSC की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जानी चाहिए ताकि वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारों की अनदेखी न हो।
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