सेबी की बड़ी कार्रवाई: पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा पर एक वर्ष का बाजार प्रतिबंध, 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना
सेबी ने ज़ी एंटरटेनमेंट के पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा को एक वर्ष के लिए शेयर बाजार से प्रतिबंधित किया तथा अनधिकृत वित्तीय व्यवस्था के मामले में 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुनीत गोयनका तथा कंपनी के संस्थापक-अध्यक्ष एमेरिटस सुभाष चंद्रा के खिलाफ बड़ी नियामकीय कार्रवाई की है। सेबी ने दोनों को एक वर्ष के लिए प्रतिभूति बाजार में खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के लेनदेन से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही दोनों पर कुल 1.48 करोड़ रुपये का मौद्रिक जुर्माना भी लगाया गया है।
शुक्रवार को जारी अपने अंतिम आदेश में सेबी ने कहा कि हैदराबाद स्थित ज़ी की संपत्ति से जुड़े एक सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) को कंपनी के निदेशक मंडल और शेयरधारकों की मंजूरी के बिना गिरवी रखा गया था। नियामक के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य एस्सेल समूह से जुड़ी कंपनियों के लिए ऋण सुरक्षित करना था।
सेबी ने अपने आदेश में कहा कि कंपनी की परिसंपत्तियों का उपयोग प्रमोटर समूह से संबंधित संस्थाओं के लाभ के लिए किया गया, जबकि इसके लिए आवश्यक कॉर्पोरेट अनुमोदन नहीं लिया गया। नियामक ने इसे कॉर्पोरेट प्रशासन (कॉरपोरेट गवर्नेंस) के सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरधारकों के हितों की उचित सुरक्षा नहीं की गई।
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आदेश के तहत पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्रा दोनों को एक वर्ष तक प्रतिभूति बाजार में किसी भी प्रकार के निवेश या लेनदेन से दूर रहना होगा। इसके अलावा उन पर संयुक्त रूप से 1.48 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। सेबी ने कहा कि जांच में यह पाया गया कि संबंधित वित्तीय लेनदेन प्रतिभूति कानूनों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे।
यह आदेश सेबी की उस विस्तृत जांच का निष्कर्ष है, जिसमें यह देखा गया कि क्या कंपनी के संसाधनों का उपयोग अनधिकृत वित्तीय व्यवस्थाओं के माध्यम से प्रमोटर समूह की कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। यह कार्रवाई ऐसे समय आई है जब ज़ी एंटरटेनमेंट अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ कॉर्पोरेट प्रशासन से जुड़े मामलों में लगातार नियामकीय जांच का सामना कर रही है।
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