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सेबी का बड़ा प्रस्ताव: पोर्टफोलियो प्रबंधकों को विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश की मिल सकती है अनुमति

सेबी ने मसौदा नियम जारी कर पोर्टफोलियो प्रबंधकों को विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश, डेरिवेटिव्स में अधिक लचीलापन और सरल अनुपालन व्यवस्था देने का प्रस्ताव सार्वजनिक परामर्श के लिए रखा।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए नियामकीय ढांचे में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है। मसौदा सेबी (पोर्टफोलियो प्रबंधक) विनियम, 2026 के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधकों को ग्राहकों की धनराशि विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश करने और सीमित दायरे में बिना हेज वाली शॉर्ट पोजिशन लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया गया है। इन मसौदा नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है।

सेबी के परामर्श पत्र के अनुसार, वर्तमान नियमों के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक ग्राहकों की राशि विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश नहीं कर सकते। नए प्रस्ताव के तहत सूचीबद्ध विदेशी इक्विटी शेयर, सूचीबद्ध विदेशी ऋण प्रतिभूतियां तथा विदेशी नियामकों द्वारा विनियमित ऐसे म्यूचुअल फंड या यूनिट ट्रस्ट में निवेश की अनुमति दी जा सकती है, जो सूचीबद्ध इक्विटी, ऋण प्रतिभूतियों और सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट) में निवेश करते हों।

सेबी का कहना है कि इससे परिष्कृत निवेशकों और उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों को विनियमित पोर्टफोलियो प्रबंधकों के माध्यम से वैश्विक निवेश अवसरों तक पहुंच मिलेगी। साथ ही यह व्यवस्था म्यूचुअल फंड, वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में कार्यरत पोर्टफोलियो प्रबंधकों के समान नियामकीय अवसर प्रदान करेगी।

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हालांकि, सभी विदेशी निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के प्रावधानों के अधीन होंगे। पोर्टफोलियो प्रबंधकों को फेमा के तहत निर्धारित सीमा, रिपोर्टिंग आवश्यकताओं का पालन करना होगा तथा विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश से पहले ग्राहकों की स्पष्ट सहमति लेना अनिवार्य होगा।

मसौदा नियमों में एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स के उपयोग में भी अधिक लचीलापन देने का प्रस्ताव है। इसके तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक किसी ग्राहक की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) के 1.25 गुना तक कुल एक्सपोजर ले सकेंगे। इसमें ग्राहक के एयूएम के 50 प्रतिशत तक बिना हेज वाली शॉर्ट पोजिशन लेने की अनुमति भी शामिल होगी।

इसके अलावा, सेबी ने सूचीबद्ध होने वाली प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति देने, विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधकों को ग्राहक के एयूएम का 10 प्रतिशत तक निवेश-योग्य गैर-सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति देने तथा कम प्रवेश बाधाओं के साथ केवल म्यूचुअल फंड आधारित पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (एमएफ-पीएमएस) ढांचा शुरू करने का भी प्रस्ताव रखा है।

मसौदा विनियमों में अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने, मौजूदा नियमों को समेकित करने और नियामकीय भाषा को अधिक स्पष्ट बनाने के उपाय भी शामिल हैं। सेबी ने संशोधित नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों से सुझाव और टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।

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